NEET प्रदर्शन हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्दोष छात्रों की तत्काल रिहाई का आदेश; 7 राज्यों को जारी किया नोटिस
नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम निर्देश जारी किए।

नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम निर्देश जारी किए। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और जिन्हें केवल प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों में गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सभी संबंधित क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है, ताकि जांच के दौरान किसी प्रकार के सबूत नष्ट न हों।
पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि याचिकाओं में पुलिस की कथित ज्यादती से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत के समक्ष ऐसे मामले आए हैं जिनमें पेलेट गन के इस्तेमाल से 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी जाने, इलेक्ट्रिक बैटन के उपयोग, एक युवती के आईसीयू में भर्ती होने, कीलों लगी लाठियों से गंभीर चोट पहुंचाने, पत्रकार से मारपीट, सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों द्वारा हिंसा और बिना किसी उकसावे के एक युवती को थप्पड़ मारने जैसे आरोप शामिल हैं।
“निर्दोषों पर अत्याचार हुआ तो कानून करेगा कार्रवाई”
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि किसी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों पर अत्याचार किया है तो कानून उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है और जवाबदेही तय किए बिना जांच का कोई मतलब नहीं रहेगा। अदालत ने कहा कि जांच समिति के गठन और उसके स्वरूप पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
सरकार ने भी रखी अपनी दलील
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हिंसा में करीब 250 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं और कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिन पर हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों के आरोप हैं। इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश
वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत से सभी साक्ष्यों और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की व्यवस्था जारी रखने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। वहीं अधिवक्ता मैथ्यूज नेदुमपरा ने अदालत के संतुलित दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि घायल लोगों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 32 की सीमाओं का भी ध्यान रखना होगा।
छात्रों ने लगाए मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया और छात्रों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया स्वतंत्र जांच का मामला बनता है और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।




