30 जुलाई से शुरू होगा सावन: महाकाल की नगरी में भक्तों का सैलाब, 3 अगस्त को निकलेगी पहली शाही सवारी
भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन माह की शुरुआत इस वर्ष गुरुवार, 30 जुलाई से हो रही है, जबकि इसका समापन 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि के साथ होगा।
उज्जैन: भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन माह की शुरुआत इस वर्ष गुरुवार, 30 जुलाई से हो रही है, जबकि इसका समापन 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि के साथ होगा। सावन के आगमन को लेकर मध्यप्रदेश सहित पूरे प्रदेश के शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं, उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, सावन माह में प्रतिदिन करीब 4 लाख श्रद्धालुओं के महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। सावन के चार और भादौ माह के दो सोमवार को भगवान महाकाल अपनी पारंपरिक राजसी सवारी के माध्यम से नगर भ्रमण करेंगे।
3 अगस्त को निकलेगी पहली सवारी
भगवान महाकाल की पहली शाही सवारी 3 अगस्त को निकलेगी, जबकि अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को आयोजित होगी। सवारी शाम 4 बजे मंदिर परिसर से रवाना होकर लगभग डेढ़ किलोमीटर का मार्ग तय करते हुए रामघाट पहुंचेगी।
रामघाट पर मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पूजन और आरती की जाएगी। इसके बाद सवारी शाम करीब 7 बजे पुनः मंदिर पहुंचेगी।
चलित आरती दर्शन की रहेगी व्यवस्था
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इस वर्ष भी सभी प्रमुख आरतियों में कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालुओं को चलित आरती दर्शन की सुविधा मिलेगी।
सभी राजसी सवारियों में जनजातीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रत्येक सवारी में पांच एलईडी रथ शामिल किए गए हैं। इसके अलावा 15 स्थानों पर मेडिकल टीमें और 24×7 एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी।
पट खुलने के समय में बदलाव
श्रावण और भादौ माह के दौरान 30 जुलाई से 7 सितंबर तक महाकाल मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह 3 बजे खुलेंगे, जबकि प्रत्येक सोमवार को मंदिर सुबह 2:30 बजे खुल जाएगा।
भस्म आरती का समय प्रतिदिन सुबह 3 बजे से 5 बजे तक रहेगा, जबकि सोमवार को यह सुबह 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगी। 8 सितंबर से मंदिर की व्यवस्था पूर्व निर्धारित समय के अनुसार संचालित होगी।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था
श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए मंदिर प्रशासन ने अलग-अलग प्रवेश मार्ग निर्धारित किए हैं। श्रद्धालु सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में स्थापित जलपात्र के माध्यम से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर सकेंगे।
श्रावण-भादौ माह में श्रद्धालु नंदी द्वार (त्रिवेणी संग्रहालय के पास), श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल मंदिर परिसर, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम से होकर दर्शन कर सकेंगे।
वहीं, नीलकंठ प्रवेश द्वार से आने वाले श्रद्धालु मानसरोवर भवन के रास्ते फेसिलिटी सेंटर-1 और टनल मार्ग से दर्शन करने के बाद निर्माल्य द्वार अथवा आपातकालीन द्वार से बाहर निकलेंगे।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्ग और व्यवस्थाओं का पालन करें, ताकि सावन माह में दर्शन सुगम और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सकें।




