July 29, 2026 |

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भोपाल 26 घंटे जाम से बेहाल: किसानों के आंदोलन से थमा शहर, लाखों लोग फंसे; पुलिस का ट्रैफिक प्लान फेल

Namaskar Madhya Pradesh

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भोपाल: राजधानी भोपाल में किसानों के आंदोलन के चलते शहर करीब 26 घंटे तक भीषण जाम से जूझता रहा। पहले होशंगाबाद रोड और उससे जुड़ी लगभग 200 कॉलोनियों के लाखों लोग घंटों तक फंसे रहे। इसके बाद आंदोलन का असर एमपी नगर, लिंक रोड नंबर-1, न्यू मार्केट, रोशनपुरा चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा और आसपास के इलाकों तक पहुंच गया, जहां हजारों वाहन लंबी कतारों में फंस गए। इस दौरान पुलिस का ट्रैफिक प्रबंधन भी सवालों के घेरे में रहा। किसानों को शहर की सीमा पर रोकने की रणनीति सफल नहीं हो सकी और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शहर के भीतर पहुंच गए।

तीन मांगों को लेकर आंदोलन

करीब 4 हजार किसान मूंग की पूरी फसल की सरकारी खरीद, ई-टोकन प्रणाली समाप्त करने तथा अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। किसान मंगलवार शाम ही भोपाल पहुंच गए थे। नर्मदापुरम से शुरू हुआ उनका आंदोलन राजधानी में पहुंचकर और तेज हो गया।

ऐसे बढ़ा आंदोलन

  • 27 जुलाई: नर्मदापुरम में किसानों का प्रदर्शन सुबह से शुरू होकर पूरे दिन चला।
  • 28 जुलाई: किसान बुधनी होते हुए भोपाल पहुंचे। शाम करीब 5 बजे वे होशंगाबाद रोड स्थित वीर सावरकर ब्रिज तक पहुंचे, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। किसान पूरी रात सड़क पर डटे रहे।
  • 29 जुलाई: सुबह से प्रदर्शन दोबारा शुरू हुआ। दिनभर नोकझोंक और झड़पों के बाद शाम करीब 5 बजे किसानों ने बैरिकेड तोड़ दिए और एमपी नगर, लिंक रोड नंबर-1, न्यू मार्केट और रोशनपुरा होते हुए पॉलीटेक्निक चौराहे की ओर बढ़ने लगे। बाद में उन्हें बाणगंगा चौराहे पर रोका गया।

शहर के बीचों-बीच लगा जाम

किसानों के शहर के अंदर पहुंचने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। पुलिस ने पॉलीटेक्निक चौराहे सहित कई स्थानों पर यातायात डायवर्ट किया, लेकिन इसके बावजूद वाहन लंबी कतारों में फंसे रहे और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

स्कूल और दफ्तर जाने वाले लोग परेशान

बुधवार सुबह होशंगाबाद रोड से एमपी नगर और अन्य इलाकों की ओर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जगह-जगह बैरिकेडिंग के कारण लोग समय पर स्कूल, दफ्तर और अन्य जरूरी कामों के लिए नहीं पहुंच सके। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सवाल उठाते हुए कहा कि जब शहर के बाहर किसानों को रोका जा सकता था, तो उन्हें शहर के भीतर आने की अनुमति क्यों दी गई। होशंगाबाद रोड से जुड़ी करीब 200 कॉलोनियों में 8 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं, जिनका जनजीवन इस आंदोलन और जाम के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ। पुलिस और प्रशासन हालात सामान्य करने के प्रयास में जुटे रहे, लेकिन देर शाम तक कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा।  
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