
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों के प्रभाव से निपटने पर चर्चा हुई। हालांकि, जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं—पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी—उनके मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना और अफवाहों पर काबू पाना रहा। हाल ही में कई राज्यों में पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। कुछ लोग बड़ी मात्रा में डीजल जमा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिमी एशिया से आयात करता है, जिसमें कच्चा तेल, एलपीजी और पीएनजी शामिल हैं। इनकी सप्लाई का अहम मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज है, जहां मौजूदा तनाव के कारण टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालांकि, ईरान ने भारत के लिए टैंकरों को निकलने की अनुमति दी हुई है।
कोरोना काल का ‘टीम इंडिया मॉडल’ फिर लागू
प्रधानमंत्री ने इस चुनौती से निपटने के लिए कोरोना काल के ‘टीम इंडिया मॉडल’ को अपनाने पर जोर दिया। इस मॉडल में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करती हैं—केंद्र जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है, जबकि राज्य सरकारें उनके प्रभावी वितरण पर ध्यान देती हैं।
कोरोना काल में जहां दवाइयों, मास्क और टेस्टिंग किट पर जोर था, वहीं अब पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएम मोदी ने सभी राज्यों से अपील की है कि वे मिलकर काम करें और स्थिति को नियंत्रित बनाए रखें।




