June 5, 2026 |

BREAKING NEWS

ब्रेकिंगमध्यप्रदेश

Mahashivratri 2026: काशी विश्वनाथ समेत देश भर के मंदिरों में भक्तों की भीड़, उज्जैन में बाबा महाकाल की विशेष पूजा और श्रृंगार

Mahashivratri 2026: उज्जैन के महाकाल मंदिर में तड़के विशेष पूजा अर्चना की गई। उज्जैन में बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती हुई।

Namaskar Madhya Pradesh

Listen to this article

Mahashivratri 2026: उज्जैन। महाशिवरात्रि के मौके पर पूरे देश के मंदिरों में बम-बम भोले की गूंज सुनाई दे रही है। काशी विश्वनाथ समेत देश भर के मंदिरों और शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ा है। इस मौके पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में तड़के विशेष पूजा अर्चना की गई। उज्जैन में बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती हुई। अब लगातार 44 घंटे तक बाबा महाकाल के पट खुले रहेंगे। इस दौरान मंदिर में 10 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में तड़के तीन बजे विशेष पंचामृत अभिषेक और भस्मारती पूजन किया गया। बाबा की भस्मारती में शामिल होने के लिए देश के कोने कोने से श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंचे।

उज्जैन में महाशिवरात्रि का खास महत्व

बाबा महाकाल कि नगरी उज्जैन में महाशिवरात्रि पर्व खास तरीके से मनाया जाता है। तड़के 3 बजे बाबा महाकाल की भस्मारती की गई। इससे पहले बाबा को पंचामृत अर्थात दूध, दही, घी, शक्कर व शहद से नहलाया गया। इसके बाद चंदन का लेपन कर सुगन्धित  द्रव्य चढ़ाए गए। बाबा की प्रिय विजया (भांग) से भी उन्हें श्रृंगारित  किया गया। इसके बाद बाबा को श्वेत वस्त्र ओढ़ाया गया और फिर प्रारंभ हुई बाबा को भस्म रमाने की प्रक्रिया। भस्म में नहाने के बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ बाबा की भस्मारती की गई।

कल दोपहर में होगी भस्मारती

फाल्गुन माह में राजाधिराज के आंगन में विवाह अर्थात् महाशिवरात्रि की धूम रहती है। इस अवसर पर शिव नवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है, जिसमें 9 दिनों तक बाबा को हल्दी-चंदन लगाकर दूल्हा रूप में सजाया जाता है। इन नौ दिनों में बाबा के 9 अलग-अलग शृंगार किए जाते हैं फिर मनाई जाती है महाशिवरात्रि। शिवरात्रि के अगले दिन दूल्हे की भांति बाबा का सेहरा सजाया जाता है। यही वह उल्लेखनीय दिन होता है, जब वर्ष में एक बार दोपहर को भस्म आरती की जाती है। सजाए गए बाबा के सेहरे को बाद में प्रसाद रूप में बांट दिया जाता है। भगवान के आकर्षण में मोहित भक्तजन प्रसाद के रूप में मिली सामग्रियां पाकर स्वयं को धन्य मानते हैं। सेहरे से मिले पुष्प तो पुष्प पंखुड़ियां तक अपने साथ ले जाते हैं। मान्यता है कि इन पुष्पों को घर में रखने से वर्षभर सुख-शांति तो रहती ही है। धन-धान्य भी भरा-पूरा रहता है।


Namaskar Madhya Pradesh

Related Articles

Check Also
Close