July 29, 2026 |

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी घर में प्रार्थना सभा के लिए अनुमति जरूरी नहीं, पुलिस नोटिस रद्द

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Chhattisgarh News: रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विवाद के बीच एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को अपने निजी आवास में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा आयोजित करने का पूर्ण अधिकार है और इसके लिए पूर्व अनुमति लेना आवश्यक नहीं है।

जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम गोधना से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए पुलिस द्वारा जारी नोटिस को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल प्रार्थना सभा आयोजित करने के आधार पर पुलिस हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

क्या है पूरा मामला?

मामले में याचिकाकर्ता 2016 से अपने घर की पहली मंजिल पर बने हॉल में ईसाई समुदाय के लिए नियमित प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे थे। याचिका में बताया गया कि इन सभाओं के दौरान कभी कोई अवैध गतिविधि या कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हुई, इसके बावजूद थाना प्रभारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर सभा रोकने का प्रयास कर रहे थे।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि प्रार्थना सभा के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि निजी आवास में शांतिपूर्ण प्रार्थना के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में प्रार्थना सभा के दौरान शोर-शराबा, कानून-व्यवस्था या किसी प्रकार का उल्लंघन होता है, तो प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।

कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और उनके नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप न हो। साथ ही 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को जारी सभी नोटिस को निरस्त कर दिया गया।


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