Damoh News: दमोह में पंचायत सचिवों की GPS अटेंडेंस पर विवाद, ‘सार्थक एप’ लागू होते ही शुरू हुआ विरोध
MP Damoh News: कलेक्टर के निर्देश पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों के लिए 'सार्थक एप' के माध्यम से GPS आधारित उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है।

MP Damoh News: दमोह। पंचायतों में सचिवों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने और ग्रामीणों को समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर के निर्देश पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों के लिए ‘सार्थक एप’ के माध्यम से GPS आधारित उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। हालांकि इस व्यवस्था के लागू होते ही कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इसे वापस लेने की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। लंबे समय से ग्रामीणों की शिकायत रही है कि कई पंचायत सचिव नियमित रूप से पंचायत मुख्यालय नहीं पहुंचते, जिससे आम लोगों के काम प्रभावित होते हैं।
ग्रामीणों को समय पर नहीं मिल पाती थीं सेवाएं
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, निवास एवं अन्य प्रमाण-पत्र, हितग्राही योजनाओं, विकास कार्यों की निगरानी और निर्माण कार्यों के भुगतान जैसे कार्य सचिवों की अनुपस्थिति के कारण लंबित रहते थे। कई बार ग्रामीणों को सचिव की तलाश में कई किलोमीटर तक भटकना पड़ता था। ऐसे में GPS आधारित उपस्थिति प्रणाली से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यस्थल पर मौजूद हैं या नहीं।
तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर जताया विरोध
कर्मचारी संगठनों ने ज्ञापन में नेटवर्क, GPS और सर्वर संबंधी तकनीकी समस्याओं का हवाला देते हुए इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि कई पंचायतों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने के कारण उपस्थिति दर्ज कराने में परेशानी आ सकती है।
सीईओ का दो टूक संदेश
जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि पंचायत सचिवों को अपने मुख्यालय पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत मुख्यालय से दूर रहना कर्मचारियों की व्यक्तिगत सुविधा हो सकती है, लेकिन इसके लिए विभाग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनका यह बयान संकेत देता है कि प्रशासन अब मुख्यालय से अनुपस्थित रहने की शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है।
जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
जानकारों का मानना है कि डिजिटल उपस्थिति प्रणाली का उद्देश्य कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाना नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाना है। यदि किसी क्षेत्र में नेटवर्क या सर्वर की वास्तविक समस्या है तो उसके समाधान के लिए वैकल्पिक तकनीकी व्यवस्था विकसित की जा सकती है, लेकिन केवल संभावित तकनीकी समस्याओं के आधार पर पूरी व्यवस्था का विरोध उचित नहीं माना जा रहा।
अब फैसले के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर
कलेक्टर की इस पहल से पंचायत कार्यालयों में नियमित उपस्थिति, समय पर सेवाएं और विकास कार्यों की बेहतर निगरानी की उम्मीद जताई जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन तकनीकी चुनौतियों का समाधान करते हुए इस व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है और पंचायत प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में यह पहल कितना असर दिखाती है।




