July 30, 2026 |

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छत्तीसगढ़ में बासमती धान की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों की आय बढ़ाने सरकार की नई पहल

Namaskar Madhya Pradesh

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CG Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बासमती धान की खेती के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। कृषि विकास मंत्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित अटल नगर के निवास कार्यालय में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें कृषि विभाग, वैज्ञानिकों और निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ. संजय त्रिपाठी, बीज निगम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों तथा इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।

किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कदम

कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए बासमती धान की खेती को प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में गंभीरता और तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी योजना

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि प्रारंभिक चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की विभिन्न किस्मों का व्यापक उत्पादन होता है, लेकिन बासमती और अन्य सुगंधित चावलों की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशेष मांग है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।

चयनित क्षेत्रों में बढ़ाया जाएगा रकबा

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां की जलवायु और तापमान बासमती धान उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। चयनित क्षेत्रों में बासमती खेती का रकबा बढ़ाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने की योजना बनाई जाएगी।

निर्यात और विपणन में मिलेगा सहयोग

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने राज्य में बासमती धान उत्पादन बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहयोग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई।

उत्पादन से निर्यात तक बनेगी समन्वित व्यवस्था

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और छत्तीसगढ़ सुगंधित चावल उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकेगा।


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