July 31, 2026 |

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Raipur News: अवैध खनन पर साय सरकार का सख्त प्रहार; अब 25 हजार से कम नहीं होगा जुर्माना

Namaskar Madhya Pradesh

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Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के तहत अवैध खनन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा, वहीं जब्त वाहनों की रिहाई के लिए भी बड़ी सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों का पारदर्शी और वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित करना तथा राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है।

अवैध खनन और परिवहन पर बढ़ा जुर्माना, अब नहीं मिलेगी आसानी से राहत

नए नियमों के अनुसार अब किसी भी अवैध खनिज परिवहन या उत्खनन के मामले में न्यूनतम 25 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से अतिरिक्त शुल्क और खनिज का पूरा मूल्य भी वसूला जाएगा। उदाहरण के लिए यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करते पकड़ा जाता है तो उसे केवल प्रशमन शुल्क के रूप में 70 हजार रुपये के साथ खनिज का मूल्य भी चुकाना होगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने वालों पर भी यही नियम लागू होंगे।

जब्त वाहन छुड़ाने के लिए जमा करनी होगी भारी सुरक्षा राशि

सरकार ने अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर भी शिकंजा कस दिया है। अब जब्त किए गए वाहन, मशीन या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी के लिए संबंधित न्यायालय में 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही वाहन मालिक को वाहन वापस मिल सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध खनन में शामिल वाहनों की दोबारा अपराध में वापसी रोकना है।

निर्माण कार्यों को मिलेगा फायदा, उत्खनन नियम हुए आसान

सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय निर्माण परियोजनाओं से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। उत्खनन अनुज्ञापत्र क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि इसकी अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए खनिजों की उपलब्धता बढ़ेगी और वैध खनन को प्रोत्साहन मिलेगा।

खनिज अन्वेषण और पंचायतों को मिलेगा बड़ा लाभ

राज्य सरकार ने “छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025” की स्थापना का निर्णय लिया है। इसके तहत गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे हर वर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है। साथ ही अब जिला पंचायतों को भी खनिज राजस्व का हिस्सा मिलेगा। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को और मजबूती मिलेगी।

डेड रेंट बढ़ा, बंद खदानों पर भी सरकार की नजर

करीब 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में वृद्धि की गई है। राज्य में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानें हैं, जिनमें कई वर्षों से बंद पड़ी हैं। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई दरों के कारण केवल गंभीर और सक्रिय पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे। निष्क्रिय खदानें समर्पित होकर दोबारा नीलामी के लिए उपलब्ध होंगी, जिससे खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

जीरो टॉलरेंस नीति के तहत होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल को अवैध खनन के खिलाफ सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। नए नियमों से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, राजस्व में वृद्धि, पारदर्शिता और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से खनन क्षेत्र में जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।


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