July 30, 2026 |

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इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाले में ED का बड़ा एक्शन: मास्टरमाइंड समेत 3 आरोपी गिरफ्तार, 92 करोड़ की अनियमितताओं के मिले सबूत

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MP Indore News: इंदौर। इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड और नगर निगम के पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा शामिल हैं। तीनों को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया है।

92 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के मिले प्रमाण

ईडी की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी से अर्जित रकम का इस्तेमाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इसी सिलसिले में ईडी ने 43 संपत्तियों को अटैच किया है।

फर्जी बिलों के जरिए निकाला गया सरकारी पैसा

जांच के दौरान यह सामने आया है कि ड्रेनेज, सीवरेज और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से ऐसे कार्यों का भुगतान स्वीकृत कराया गया, जो या तो धरातल पर मौजूद ही नहीं थे या फिर उनकी वास्तविक लागत और कार्य को कई गुना बढ़ाकर दर्शाया गया था।

मौके पर नहीं मिले कार्यों के प्रमाण

ईडी के अनुसार कई परियोजनाओं में करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान संबंधित कार्यों के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और धन के प्रवाह की भी गहन पड़ताल कर रही है।

जांच के प्रमुख तथ्य

  • करीब 92 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी के साक्ष्य मिले।
  • पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर सहित तीन आरोपी गिरफ्तार।
  • स्पेशल कोर्ट ने तीन दिन की ईडी रिमांड मंजूर की।
  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित 43 संपत्तियां अटैच।
  • फर्जी निर्माण कार्यों और जाली बिलों के जरिए राशि निकाले जाने का आरोप।
  • अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की भूमिका जांच के दायरे में।

रिमांड में खुल सकते हैं कई बड़े राज

ईडी को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ में धन के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और कथित घोटाले से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसी इस बात का भी पता लगा रही है कि फर्जी बिलों के जरिए निकाली गई राशि का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया।

घोटाले की जांच में आ सकता है नया मोड़

नगर निगम से जुड़े इस चर्चित मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद जांच तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा इस कथित घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।


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