बड़वानी में CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, 7 अधिकारी-कर्मचारियों के निलंबन के निर्देश; एक को नोटिस

बड़वानी। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत बड़वानी पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकारी कामकाज में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया। शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद के दौरान सामने आए अलग-अलग मामलों में मुख्यमंत्री ने एक तहसीलदार, दो पटवारी, दो सीएमओ, एक सहायक यंत्री और जनपद पंचायत के तत्कालीन CEO समेत 7 अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं, एक अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता के काम में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अच्छा काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का सम्मान किया जाएगा, लेकिन काम में लापरवाही या योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
नामांतरण में छह साल की देरी, तीन पर गिरी गाज
राजपुर तहसील के अजय ने मुख्यमंत्री को बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने वर्ष 2016 में नामांतरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी हुई। मामले में छह साल की देरी सामने आने पर मुख्यमंत्री ने तत्कालीन तहसीलदार आशा परमार और पटवारी मांगीलाल नरगांवे व ललित बोरसे को निलंबित करने के निर्देश दिए।
PM आवास की किश्त में देरी पर CMO और इंजीनियर निलंबित
प्रधानमंत्री आवास योजना के शिकायतकर्ता रुपेश शर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 में आवेदन करने के बावजूद मकान बनने के बाद उन्हें पहली किश्त 10 अगस्त को मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अवधि में पदस्थ CMO मायाराम सोलंकी, जगदीश धाकड़ और सहायक यंत्री राजू डावर को निलंबित करने के निर्देश दिए। वहीं, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन इंदौर एस.के. सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
संबल योजना में देरी पर तत्कालीन CEO पर कार्रवाई
संबल योजना के तहत वर्ष 2019 से सहायता राशि नहीं मिलने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने पानसेमल जनपद पंचायत के तत्कालीन CEO सौरभ सिंह ठाकुर को निलंबित करने के निर्देश दिए। जांच में प्राथमिकता सूची में नीचे मौजूद हितग्राहियों को पहले लाभ दिए जाने के कुल 16 मामले सामने आए थे।
बाल आशीर्वाद और पशु बीमा में देरी की भी जांच
मुख्यमंत्री ने बाल आशीर्वाद योजना में भुगतान में हुई देरी और पशु बीमा की राशि मिलने में दो साल से अधिक समय लगने के मामलों की भी जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए और उन्हें अपने काम के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और जनता के काम में लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।




