June 4, 2026 |

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भोपाल से रवाना हुई ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’, CM मोहन यादव बोले- सनातन संस्कृति की ध्वजा हमेशा लहराती रही

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Somnath Swabhiman Yatra 2026: भोपाल। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सनातन चेतना के संगम के रूप में ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’ की शुरुआत भोपाल से हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से इस विशेष तीर्थ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मध्यप्रदेश से पहली बार रेल मार्ग के जरिए शुरू हुई इस यात्रा में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक है। उन्होंने इसे द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित बताते हुए कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। हेली सेवा के बाद अब रेल मार्ग से ऐसी विशेष यात्राएं श्रद्धालुओं की सुविधा और पहुंच को आसान बनाएंगी।

‘गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा’

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, “सिंधु जिनके चरण पखारता है और जिनके मस्तक पर चंद्र देव विराजमान हैं, उन भगवान सोमनाथ के चरणों में कोटि-कोटि वंदन।” उन्होंने कहा कि सोमनाथ का संबंध देश के स्वाभिमान से है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “विरासत से विकास” की यात्रा आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, सड़क और उद्योगों के साथ-साथ सनातन संस्कृति को भी आगे बढ़ाने का काम कर रही है। “आज गंगोत्री से गंगा सागर तक आनंद बिखर रहा है। अयोध्या, मथुरा और कालीघाट की तरह पूरे देश में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का माहौल है,” उन्होंने कहा।

‘17 हमलों के बाद भी नहीं झुकी सनातन संस्कृति’

मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर पर 17 बार हमले हुए, लेकिन सनातन संस्कृति की ध्वजा हमेशा लहराती रही। “एक हजार साल बाद आज सोमनाथ का शिखर फिर आसमान से बात कर रहा है,” उन्होंने कहा।

सीएम ने यात्रियों से बाबा सोमनाथ से देश और दुनिया में सुख-समृद्धि और शांति की कामना करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह सांस्कृतिक जागरण राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करेगा।

‘जीवन भी एक यात्रा है’

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन भी एक यात्रा की तरह है। “इस जीवन में हमें जो अवसर मिला है, उसका उपयोग परोपकार और समाजहित के कार्यों में करना चाहिए,”


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