मध्य प्रदेश में गड्ढों और सड़क हादसों पर जबलपुर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, सरकार से मांगा जवाब; अगली सुनवाई 5 अगस्त को
मध्य प्रदेश में जर्जर सड़कों, गड्ढों और बढ़ते सड़क हादसों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

जबलपुर: मध्य प्रदेश में जर्जर सड़कों, गड्ढों और बढ़ते सड़क हादसों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखी टिप्पणी करते हुए टिकाऊ सड़कों के निर्माण पर सवाल उठाए।
‘समुद्र के नीचे मेट्रो बन सकती है, तो अच्छी सड़कें क्यों नहीं?’
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब देश में न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाए जा सकते हैं और मुंबई में समुद्र के नीचे मेट्रो रूट तैयार किया जा सकता है, तो टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण सड़कें बनाना क्यों संभव नहीं है। अदालत ने प्रशासनिक लापरवाही पर भी नाराजगी जताई।
जनहित याचिका में उठे सड़क सुरक्षा के मुद्दे
यह जनहित याचिका इंदौर निवासी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश की खराब और गड्ढों वाली सड़कें लगातार सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। साथ ही सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी, रखरखाव में लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता को हादसों की बड़ी वजह बताया गया है।
एमपी में बढ़ रहे सड़क हादसों पर चिंता
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। ऐसे में सड़क सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है।
केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को होगी, जिसमें सरकार से सड़क निर्माण, रखरखाव और सुरक्षा उपायों को लेकर विस्तृत जवाब मांगा जाएगा।



