June 12, 2026 |

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Rajgarh News: राजगढ़ में बड़ा अनाज घोटाला! 51 हजार टन गेहूं में लगा घुन, 1354 करोड़ की फसल खराब

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Grain scam in Rajgarh: राजगढ़। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में सरकारी गेहूं भंडारण व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ब्यावरा स्थित प्रभुकृपा परिसर के श्री यादव गोदाम सहित जिले के कई वेयरहाउसों में रखा 51,602.01 मीट्रिक टन गेहूं घुन लगने से खराब हो गया है। खराब हुए गेहूं की अनुमानित कीमत 1354.55 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह गेहूं किसानों से 2625 रुपये प्रति क्विंटल की समर्थन मूल्य दर पर खरीदा गया था और इसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जरूरतमंद लोगों को वितरित किया जाना था।

भारतीय खाद्य निगम (FCI) और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड की निरीक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले के करीब 35 गोदामों में रखा गेहूं घुन लगने और बुरादे में तब्दील होने की स्थिति में पहुंच गया है। रिपोर्ट के बाद संबंधित गोदामों में रखे अनाज को कीटमुक्त करने और सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

किराया मिलता रहा, फिर भी सुरक्षित नहीं रहा अनाज

विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान खरीदे गए गेहूं को निजी वेयरहाउसों में भंडारित किया गया था, जहां सरकार की ओर से प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से किराया भी दिया जा रहा था। इसके बावजूद भंडारण व्यवस्था की खामियों के कारण बड़ी मात्रा में अनाज खराब हो गया।

32 से अधिक गोदामों में मिला संक्रमित गेहूं

नरसिंहगढ़, खिलचीपुर और ब्यावरा क्षेत्र के कई वेयरहाउसों में हजारों मीट्रिक टन गेहूं में कीट लगने की पुष्टि हुई है। निरीक्षण रिपोर्ट में ममता, माही सरिता, जयश्री, विनायक, भारत, राम लॉजिस्टिक, श्रीराम, श्रीशक्ति, सलूजा, यादव, राधाकृष्णा और अन्य गोदामों का उल्लेख किया गया है।

कार्रवाई नहीं होने पर उठे सवाल

इतने बड़े नुकसान का मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद जिम्मेदार विभाग खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

कीटमुक्त करने की तैयारी

वेयरहाउस कॉरपोरेशन के प्रबंधक प्रेमनारायण केसरिया ने बताया कि प्रभावित गेहूं को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं और गोलियों का उपयोग कर स्टैक को कवर किया जाएगा। उनका कहना है कि बार-बार नमी और पानी गिरने जैसी परिस्थितियों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

इस पूरे मामले ने सरकारी भंडारण व्यवस्था और खाद्यान्न संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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