July 30, 2026 |

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच, शंभू बॉर्डर पर हाई अलर्ट; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Delhi Kisan Andolan: किसानों ने दिल्ली के किसान घाट पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है, जिसके मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

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Delhi Kisan Andolan: नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील/मुक्त व्यापार समझौता) के विरोध में सोमवार को विभिन्न किसान संगठनों ने दिल्ली कूच का ऐलान किया है। किसानों के मार्च को देखते हुए हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग की है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों ने दिल्ली के किसान घाट पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है, जिसके मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

बॉर्डर पर पुलिस का कड़ा पहरा

किसानों के दिल्ली की ओर बढ़ने की संभावना को देखते हुए शंभू बॉर्डर और घग्गर पुल पर बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग की गई है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के साथ-साथ जेसीबी मशीनें और क्रेन भी तैनात की हैं। हालांकि, फिलहाल नेशनल हाईवे-44 को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

बसों और निजी वाहनों से पहुंचे किसान

किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढेर ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के किसान इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। शंभू बॉर्डर पर करीब 100 बसों और निजी वाहनों से किसान पहुंचे हैं। किसानों की संख्या लगभग 1,000 से 1,500 बताई जा रही है। इनमें अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, ब्यास, लुधियाना और कपूरथला समेत पंजाब के विभिन्न जिलों के किसान शामिल हैं। इस बार किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बजाय बसों और निजी वाहनों से दिल्ली रवाना हुए हैं।

ट्रेड डील से किसानों को नुकसान की आशंका

सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया कि यदि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत सस्ते कृषि उत्पादों के आयात को मंजूरी मिलती है, तो इसका सीधा असर देश के किसानों, खेतिहर मजदूरों, पशुपालकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और सेवा क्षेत्र पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

सरकार से समझौता रद्द करने की मांग

पंजाब के कई किसान संगठनों ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से इसे रद्द करने और किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। किसान संगठनों का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।


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