June 5, 2026 |

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महाकाल मंदिर के पास जमीन घोटाले का आरोप, 31 करोड़ की सरकारी भूमि 3.82 करोड़ में बेची, BJP विधायक का नाम आने से गरमाई सियासत

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MP Ujjain Latest News: उज्जैन। विश्वप्रसिद्ध महाकाल मंदिर के पास स्थित करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि करीब 45 हजार वर्गफीट शासकीय भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर निजी नामों पर ट्रांसफर किया गया और फिर उसे बेहद कम कीमत में बेच दिया गया। इस जमीन पर अब फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी होने की बात कही जा रही है। मामले में कांग्रेस पार्षद ने मुख्य सचिव, लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) से शिकायत की है। वहीं इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।

भाजपा विधायक समेत कई रसूखदारों के नाम सामने आए

जानकारी के अनुसार 2 मार्च 2026 को ‘यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी ने यह जमीन 3.82 करोड़ रुपए में खरीदी। आरोप है कि कंपनी से जुड़े डायरेक्टर्स और पार्टनर्स में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी शासकीय भूमि

शिकायत में दावा किया गया है कि खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 वर्ष 1950 और 1967-68 के राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थे। आरोप है कि बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से इन्हें निजी भूमि में परिवर्तित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि वर्तमान में इस जमीन का उपयोग महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की पार्किंग के रूप में किया जा रहा है।

कमर्शियल जमीन को कृषि भूमि बताने का आरोप

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि व्यावसायिक उपयोग वाली इस जमीन को दस्तावेजों में कृषि भूमि बताया गया। जबकि जमीन पर पहले से मैरिज गार्डन और अन्य स्थायी निर्माण मौजूद थे, लेकिन रिकॉर्ड में केवल टिन शेड दर्शाया गया। कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक जमीन की कीमत 75,400 रुपए प्रति वर्गमीटर होनी चाहिए थी, लेकिन रजिस्ट्री में इसे सिर्फ 22,500 रुपए प्रति वर्गमीटर दर्शाया गया।

सरकार को करोड़ों के राजस्व नुकसान का दावा

दस्तावेजों के अनुसार 4180 वर्गमीटर जमीन की वास्तविक कीमत करीब 31.51 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस हिसाब से सरकार को लगभग 2.99 करोड़ रुपए स्टांप शुल्क और 94 लाख रुपए से अधिक पंजीयन शुल्क मिलना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि कम मूल्यांकन दिखाकर सरकार को केवल 40.36 लाख रुपए स्टांप ड्यूटी और 12.90 लाख रुपए रजिस्ट्रेशन फीस दी गई, जिससे करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।

विधायक ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने कहा कि हरि फाटक और कल्प क्षेत्र की पार्किंग व्यवस्था नगर निगम के अधीन है, इसलिए जमीन के स्वामित्व और उपयोग की जानकारी निगम से मिल सकेगी। वहीं भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह वैध तरीके से हुई है और सभी कर नियमों के अनुसार जमा किए गए हैं। हालांकि लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज होने के बाद अब मामले में उच्चस्तरीय जांच की संभावना बढ़ गई है।
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