July 30, 2026 |

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Raipur News: छत्तीसगढ़ में निकाह के नए नियम; अब सिर्फ रजिस्टर्ड मौलाना ही करा सकेंगे निकाह

Namaskar Madhya Pradesh

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Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में निकाह प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। फर्जी निकाह, पहचान छिपाकर शादी करने और विवाह से जुड़े विवादों को रोकने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। अगस्त 2026 से प्रदेश में केवल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत मौलाना ही निकाह करा सकेंगे। बोर्ड का कहना है कि इस कदम से निकाह प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों को कम किया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में निकाह का कोई केंद्रीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार पहचान, वैवाहिक स्थिति और दस्तावेजों को लेकर समस्याएं सामने आती हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अब प्रदेश के सभी निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं का वक्फ बोर्ड में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा रहा है।

बिना रजिस्ट्रेशन निकाह कराने पर होगी कार्रवाई

नई व्यवस्था के तहत कोई भी मौलाना बिना पंजीकरण के निकाह नहीं करा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करते हुए निकाह कराता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वक्फ बोर्ड सभी पंजीकृत मौलानाओं का रिकॉर्ड तैयार करेगा, जिससे निकाह कराने वाली प्रक्रिया में जवाबदेही तय हो सके।

निकाहनामा अब तीन भाषाओं में होगा जारी

वक्फ बोर्ड ने निकाहनामे के प्रारूप में भी बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब निकाहनामा हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू तीनों भाषाओं में जारी किया जाएगा। नए फॉर्मेट में दूल्हा-दुल्हन के पहचान पत्र, विशेष रूप से आधार कार्ड की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा निकाह पढ़ाने वाले मौलाना का नाम और मोबाइल नंबर भी निकाहनामे में दर्ज किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के अनुसार प्रत्येक निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा और डिजिटल सर्टिफिकेट की रसीद भी वक्फ बोर्ड स्तर से जारी की जाएगी।

अंतर-धार्मिक निकाह के लिए होगी दस्तावेजों की जांच

वक्फ बोर्ड ने अंतर-धार्मिक निकाह को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है तो ऐसी स्थिति में वक्फ बोर्ड की अनुमति आवश्यक होगी। दोनों पक्षों की सहमति, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

बोर्ड के अनुसार यदि गैर-मुस्लिम पक्ष ने धर्म परिवर्तन नहीं किया है तो पहले कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही दूसरे धर्म की लड़की के परिजनों की सहमति को भी महत्वपूर्ण माना गया है। परिजनों की अनुमति के बिना मौलाना निकाह नहीं पढ़ा सकेंगे।

आदिवासी क्षेत्रों में शिकायतों के बाद लिया गया फैसला

वक्फ बोर्ड को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि प्रदेश के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में पहचान छिपाकर या संपत्ति के लालच में विवाह किए जा रहे हैं। बोर्ड ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निकाह प्रक्रिया में निगरानी और रिकॉर्ड व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया है।

बोर्ड का कहना है कि नए नियम लागू होने के बाद हर निकाह का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे फर्जी मामलों और गलत तरीके से होने वाले विवाहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

नए नियमों पर काजी ने जताई आपत्ति

वहीं काजी मौलाना अशरफ जिलानी ने वक्फ बोर्ड के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार वक्फ बोर्ड धार्मिक प्रक्रियाओं में दखल नहीं दे सकता।

मौलाना जिलानी ने कहा कि निकाह के लिए कलेक्टर स्तर का रजिस्ट्रेशन पर्याप्त है। उन्होंने लव जिहाद जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर वक्फ बोर्ड का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल निकाह प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और फर्जी मामलों पर रोक लगाना है।


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