केन-बेतवा परियोजना के विस्थापित ग्रामीण पहुंचे दिल्ली, राहुल गांधी से लगाई न्याय की गुहार
बुंदेलखंड के विकास और जल संकट के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का विरोध अब दिल्ली तक पहुंच गया है।

नई दिल्ली। बुंदेलखंड के विकास और जल संकट के समाधान के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों का विरोध अब दिल्ली तक पहुंच गया है। परियोजना के कारण विस्थापन, मुआवजे की कथित विसंगतियों और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी के सामने केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याएं रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के चलते क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों को अपने घर और जमीन से विस्थापित होना पड़ा है। प्रभावित परिवार लंबे समय से जमीन के बदले उचित और सम्मानजनक मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
मुआवजे और पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए जाने के बावजूद शासन और प्रशासन की ओर से उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा, पुनर्वास और बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए राहुल गांधी से राजनीतिक हस्तक्षेप की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन के बाद प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका और भविष्य को लेकर कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उनका कहना है कि विकास परियोजना से प्रभावित लोगों के हितों और अधिकारों की भी समान रूप से रक्षा की जानी चाहिए।
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद जगी न्याय की उम्मीद
दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद प्रभावित ग्रामीणों में न्याय को लेकर नई उम्मीद जगी है। ग्रामीणों को भरोसा है कि राहुल गांधी से मुलाकात के बाद विस्थापन और मुआवजे का मुद्दा राष्ट्रीय और राजनीतिक स्तर पर मजबूती से उठेगा और सरकार पर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए दबाव बनेगा।
केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विस्थापन और मुआवजे का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान किया जाना चाहिए।
परियोजना के विरोध में लगातार आंदोलन
केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों की ओर से समय-समय पर विरोध प्रदर्शन किए जाते रहे हैं। जुलाई 2026 में छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी क्षेत्र में भी ग्रामीणों ने जल सत्याग्रह और प्रतीकात्मक विरोध के जरिए अपनी मांगें उठाई थीं।
19 जुलाई 2026 को पुलिस प्रशासन द्वारा इस आंदोलन को समाप्त कराया गया था। इसके बाद भी प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे उचित मुआवजे, पुनर्वास तथा अपने अधिकारों की मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।
विकास के साथ प्रभावितों के अधिकारों पर जोर
ग्रामीणों का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन परियोजना से प्रभावित परिवारों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनका जोर है कि विकास के साथ विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और आजीविका के सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।




