April 19, 2026 |

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Dev Uthani Ekadashi 2025: 1 नवंबर को देव उठनी एकादशी, देखें पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती समेत सारी जानकारी

Dev Uthani Ekadashi 2025: कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को प्रबोधिनी एकादशी, देवउठनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

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Dev Uthani Ekadashi 2025: कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को प्रबोधिनी एकादशी, देवउठनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का बड़ा ही महत्व है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन चातुर्मास भी समाप्त हो जाता है। दरअसल, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की हरिशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरु हो जाते है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक होते हैं। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु का शयनकाल होता है।

इन चार महीनों के दौरान विवाह आदि सभी शुभ कार्य बंद होते हैं जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की देव उठनी एकादशी से फिर से प्रारंभ होते हैं। ऐसे में इन मांगलिक कार्यों को और भी मंगल बनाने के लिये आज देवोत्थानी एकादशी के दिन तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) कराने की भी परंपरा है। इस दिन शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया जाता है। चलिए अब जानते हैं देव उठनी एकादशी की पूजा विधि, मुहूर्त समेत संपूर्ण जानकारी।

देव उठनी एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त (Dev Uthani Ekadashi 2025 Shubh Muhurat)

  • देवउत्थान एकादशी – 1 नवंबर 2025, शनिवार
  • 2 नवम्बर को पारण का समय – 01:11 PM से 03:23 PM
  • पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 12:55 PM
  • एकादशी तिथि प्रारम्भ – 01 नवंबर 2025 को 09:11 AM बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त – 02 नवंबर 2025 को 07:31 AM बजे

देव उठनी एकादशी सामग्री लिस्ट (Dev Uthani Ekadashi Samagri List)

गेरू और खड़िया (देवताओं के चित्र बनाने के लिए), 2 स्टील की परात (एक में सामान और एक ढकने के लिए), तुलसी का पौधा और पत्ता, दीपक, चावल (अक्षत), रोली और हल्दी, पंचामृत, पान, सुपारी, इलायची, गुड़ या मिश्री, कलश, जल, फूल, धूपबत्ती, शंख और घंटी, गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद आदि 5 मौसमी फल, एक छोटी लकड़ी की चौकी और पीला वस्त्र।

देव उठनी एकादशी पूजा विधि (Dev Uthani Ekadashi Puja Vidhi)

  • देव उठनी एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • घर की अच्छे से सफाई करने के बाद स्नान आदि से कार्य से निवृत्त होकर आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाएं।
  • फिर एक ओखली में गेरू से चित्र बाएं और उस स्थान पर फल, सिंघाड़े, मिठाई, बेर, ऋतुफल और गन्ना रखकर उसे डलिया से ढांक देना चाहिए।
  • रात में भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करने के बाद घरों के बाहर और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। एक दीपक तुलसी के पौधे के समक्ष भी जरूर जलाएं।
  • इस दिन भगवान को शंख, घंटा-घड़ियाल आदि बजाकर उठाया जाता है और साथ ही ये बोला जाता है- उठो देवा, बैठा देवा, आंगुरिया चटकाओ देवा, नई सूत, नई कपास, देव उठाये कार्तिक मास।
  • इसके बाद भगवान की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।

देव उठनी एकादशी की कथा (Dev Uthani Ekadashi Ki Katha)

एक दिन मां लक्ष्मी ने भगवान नारायण से पूछा- “हे नाथ! आप दिन रात जागा करते हैं और जब सोते हैं तो लाखों-करड़ों वर्ष के लिए सो जाते हैं और उस दौरान समस्त चराचर का नाश कर डालते हैं। इसलिए आप ऐसा करें कि नियम से हर वर्ष निद्रा लिया करें। इससे मुझे भी कुछ समय के लिए आराम मिल जाएगा। लक्ष्मी जी की मुख से ये बात सुनकर नारायण जी मुस्कुराए और बोले- “देवी! तुमने ये ठीक ही कहा है। मेरे जागने से सब देवों और तुमको कष्ट होता है। तुम्हें तो मेरी वजह से बिल्कुल भी अवकाश नहीं मिलता। अतः तुम्हारे कहे अनुसार ही आज से मैं प्रतिवर्ष चार माह के लिए वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। उस समय तुम्हें और समस्त देवगणों को भी आराम मिल जाएगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और प्रलय कालीन महानिद्रा कहलाएगी। इस काल में मेरे जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे और मेरे शयन व उत्थान के उत्सव को आनंदपूर्वक मनाएंगे उनके घर में, मैं तुम्हारे साथ निवास करूंगा।”

देव उठनी एकादशी मंत्र (Dev Uthani Ekadashi Mantra)

1. उठो देवा, बैठा देवा, आंगुरिया चटकाओ देवा, नई सूत, नई कपास, देव उठाये कार्तिक मास।

2. ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

3. ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

4. वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |
पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी ।।
एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |
य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत।।

5. उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज,
उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यमङ्लं कुरु ॥

देव उठनी एकादशी भजन (Dev Uthani Ekadashi Bhajan)

  • उठो देव बैठो देव – पाटकली चटकाओ देव
  • आषाढ़ में सोए देव – कार्तिक में जागे देव
  • कोरा कलशा मीठा पानी – उठो देव पियो पानी
  • हाथ पैर फटकारी देव – आंगुलिया चटकाओ देव
  • कुवारी के ब्याह कराओ देव-ब्याह के गौने कराओ
  • तुम पर फूल चढ़ाए देव-घीका दीया जलाये देव
  • आओ देव पधारो देव-तुमको हम मनाएं देव चूल्हा पीछे पांच पछीटे सासू जी बलदाऊ जी धारे रे बेटा
  • ओने कोने झांझ मंजीरा – सहोदर किशन जी तुम्हारे वीरा
  • ओने कोने रखे अनार ये है किशन जी तुम्हारे व्यार
  • ओने कोने लटकी चाबी सहोदरा ये है तुम्हारी भाभी
  • जितनी खूंटी टांगो सूट – उतने इस घर जन्मे पूत
  • जितनी इस घर सीक सलाई-उतनी इस घर बहुएं आईं
  • जितनी इस घर ईंट और रोडे उत‌ने इस घर हाथी-घोड़े
  • गन्ने का भोग लगाओ देव सिंघाड़े का भोग लगाओ देव
  • बेर का भोग लगाओ देव गाजर का भोग लगाओ देव
  • गाजर का भोग लगाओं देव
  • उठो देव उठो

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