June 4, 2026 |

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100 करोड़ की मैनपावर सप्लाई निविदा विवादों में: “मैच फिक्सिंग” और अनियमितताओं के आरोप, जांच की मांग तेज

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Match-fixing News: रायपुर। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी करीब 100 करोड़ रुपये की मैनपावर सप्लाई निविदा अब विवादों में घिर गई है। स्थानीय एजेंसियों और व्यापारिक संगठनों ने टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता और “मैच फिक्सिंग” के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि निविदा की शर्तें पहले से तय एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थीं।

EMD राशि को लेकर उठा विवाद

सबसे बड़ा विवाद Earnest Money Deposit (EMD) को लेकर सामने आया है। करीब 100 करोड़ रुपये की निविदा के लिए मात्र 6 लाख रुपये की EMD तय किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी निविदा के मुकाबले यह राशि बेहद कम है और सामान्य सरकारी नियमों व प्रक्रियाओं के विपरीत है।

व्यापारियों का आरोप है कि EMD की कम राशि और अन्य शर्तें किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तय की गई थीं।

अलग-अलग सेवाओं को एक ही टेंडर में जोड़ने पर आपत्ति

निविदा में सुरक्षा गार्ड, सफाई कर्मी, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइवर, फिटर और तकनीकी स्टाफ जैसी विभिन्न सेवाओं को एक साथ शामिल किया गया है। पहले इन सेवाओं के लिए अलग-अलग टेंडर जारी होते थे, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के स्थानीय ठेकेदार भी भाग ले पाते थे।

अब सभी सेवाओं को एक साथ जोड़ देने से छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए पात्रता हासिल करना लगभग असंभव हो गया है।

पात्रता शर्तों पर भी सवा

स्थानीय एजेंसियों ने निविदा की पात्रता शर्तों को भी अव्यावहारिक बताया है। टेंडर में न्यूनतम 300 मैनपावर का अनुभव, 10 करोड़ रुपये का एकल वर्क ऑर्डर और 100 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर जैसी शर्तें रखी गई हैं।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत राज्य में कभी भी 300 कर्मचारियों वाला एकल कार्यादेश जारी नहीं हुआ, ऐसे में यह शर्तें केवल बड़ी बाहरी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।

GeM पोर्टल पर टेंडर नहीं डालने का आरोप

स्थानीय सेवा प्रदाताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के 2017 के निर्देशों के बावजूद इस निविदा को Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल पर प्रकाशित नहीं किया गया। साथ ही टेंडर का पर्याप्त प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया, जिससे कई एजेंसियों को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

मामले को लेकर विभिन्न व्यापारिक संगठनों और सेवा प्रदाताओं ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने EMD निर्धारण, पात्रता शर्तों, GeM पोर्टल के उपयोग नहीं करने और पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

क्या बोले चिकित्सा शिक्षा संचालक?

मामले पर चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. यूएस पैकरा ने कहा कि टेंडर को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि प्रक्रिया GeM पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई थी, लेकिन फिलहाल टेंडर हटा दिया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।


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