April 17, 2026 |

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तिरंगा ध्वज के कथित अपमान का मामला: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को कोर्ट का नोटिस, 7 अप्रैल को पेश होने के निर्देश

Notice to Rao Uday Pratap Singh: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा ध्वज के कथित अपमान के मामले में जबलपुर की विशेष अदालत ने नोटिस जारी किया है।

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Notice to Rao Uday Pratap Singh: जबलपुर: मध्यप्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा ध्वज के कथित अपमान के मामले में जबलपुर की विशेष अदालत ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है और पूछा है कि राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए। कोर्ट ने उन्हें 7 अप्रैल 2026 को पेश होने के निर्देश दिए हैं।

विशेष न्यायालय (सांसद/विधायक मामले) के न्यायाधीश डी.पी. सूत्रकार की अदालत ने यह कार्रवाई नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट द्वारा दायर परिवाद पर की है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 में आयोजित तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अनादर किया गया।

परिवादी के अनुसार 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया था, जिसका नेतृत्व मंत्री राव उदय प्रताप सिंह कर रहे थे। आरोप है कि इस दौरान मंत्री खुली जीप में खड़े होकर लोगों को संबोधित कर रहे थे और जीप के बोनट पर तिरंगा ध्वज इस तरह लगाया गया था कि वह झुक रहा था तथा जीप पर खड़े व्यक्ति के पैर को छू रहा था।

परिवाद में कहा गया है कि यह कृत्य राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के प्रावधानों का उल्लंघन है। कानून के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य हिस्से पर इस तरह लगाने या ढकने की अनुमति नहीं है। इस अपराध में तीन साल तक के कारावास का प्रावधान है।

परिवादी ने अदालत को बताया कि इस घटना की शिकायत गाडरवारा थाना में की गई थी, लेकिन मंत्री के पद का हवाला देकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक को भी कई बार लिखित शिकायत भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पंजीकृत डाक से भेजी गई शिकायत को थाना प्रभारी द्वारा लेने से भी इनकार कर दिया गया।

परिवादी ने अपने आवेदन में सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) मामले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है।

मामले में परिवादी द्वारा घटना की तस्वीरें, मीडिया क्लिपिंग, डाक अस्वीकार की ट्रैकिंग रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।


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