April 19, 2026 |

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Chandra Grahan 2025: कब लगेगा चंद्र ग्रहण? भारत में दिखेगा असर या नहीं, जानें सूतक काल का समय

Chandra Grahan 2025: सितंबर में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण भारतवर्ष में दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा।

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Chandra Grahan 2025: सितंबर में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है। यह चंद्र ग्रहण भारतवर्ष में दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो कुंभ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा। खगोलविद इस चंद्र ग्रहण को ‘ब्लड मून’ कह रहे हैं। यह वो समय होता है, जब आकाश में चंद्रमा एकदम लाल दिखाई पड़ता है। इस चंद्र ग्रहण की तारीख को लेकर लोगों में बड़ी कन्फ्यूजन है। कोई 7 सितंबर तो कोई 8 सितंबर को चंद्र ग्रहण बता रहा है। आइए आपको इस चंद्र ग्रहण की सही तारीख बताते हैं।

कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण? (Chandra Grahan 2025 Date Time)

7 सितंबर को लगने वाला चंद्र ग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा और देर रात 1 बजकर 26 मिनट पर ग्रहण की समाप्ति होगी। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटा 28 मिनट बताई जा रही है।

कितने बजे शुरू होगा सूतक काल? (Chandra Grahan 2025 Sutak Kaal Time)

यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। पंचांग के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। आगामी चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होने वाला है।

चंद्र ग्रहण और सूतक काल में क्या न करे? (Chandra Grahan 2025 Dos and Don’ts)

चंद्र ग्रहण और सूतक काल में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना व धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते। इस दौरान गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. इन लोगों को घर से बाहर जाने से परहेज करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को नुकीले औजारों का प्रयोग, सब्जी काटना, खाना पकाना, कड़ाही-तवे पर छोंक आदि कार्यों से बचना चाहिए।

चंद्र ग्रहण से पितृपक्ष की शुरुआत (Chandra Grahan 2025 Pitru Paksha)

यह चंद्र ग्रहण भाद्रपद मास की पूर्णिमा पर लगेगा। भाद्रपद पूर्णिमा से ही पितृपक्ष की शुरुआत होती है। 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण के दिन ही पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध किया जाता है। ऐसे में ज्योतिषविदों की सलाह है कि पितृपक्ष से जुड़े रिवाज और श्राद्ध कर्म सूतक काल शुरू होने से पहले ही संपन्न कर लेने चाहिए।

कब लगता है चंद्र ग्रहण?

खगोलविदों के अनुसार, पृथ्वी जब अपनी कक्षा में घूमते हुए सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो वह सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। नतीजन चंद्रमा का रंग काला या लाल रंग का दिखाई देने लगता है। इसी घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है।


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