September 14, 2026 |

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CG News: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण रोकने के लिए विधानसभा में नया विधेयक पेश, विपक्ष का हंगामा और वॉकआउट

CG Assembly Budget Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को गृहमंत्री विजय शर्मा ने “छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक” पेश किया।

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CG Assembly Budget Session: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को गृहमंत्री विजय शर्मा ने “छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक” पेश किया। इस बिल का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। चर्चा के बाद इसे पारित किए जाने की संभावना है।

विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून पहले से कई राज्यों में लागू हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, इसलिए इसे जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग करते हुए कहा कि इसमें रिटायर्ड जजों और सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए।

वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसा कानून लागू किया गया था। उन्होंने इसे राजनीतिक विरोध बताया।

सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में विपक्ष ने SIR से जुड़े मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाया और दावा किया कि प्रदेश में 19 लाख नाम काटे गए हैं। इस पर सत्ता पक्ष ने इसे जनहित का मुद्दा न मानते हुए विरोध किया, जिससे सदन में तीखी बहस और हंगामा हुआ। अंततः विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।

इसके अलावा वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं को सुविधाएं देने और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने रायपुर के भाठागांव स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया। इस पर जवाब देते हुए अजय चंद्राकर ने हल्के अंदाज में कहा कि “बाकी डॉक्टर फिल्म देखने गए हैं”, जिससे सदन में हलचल हुई।

सदन की अध्यक्षता कर रहे धर्मलाल कौशिक ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज करते हुए विधेयक पेश करने की अनुमति दे दी। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के वॉकआउट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह “वॉकआउट नहीं, बल्कि भागना” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे राज्य सरकार इस तरह का कानून न बना सके।

गौरतलब है कि यह विधेयक हाल ही में राज्य कैबिनेट से मंजूर हुआ था। सरकार का कहना है कि इसमें 1968 के मौजूदा कानून को और मजबूत करते हुए डिजिटल और आर्थिक प्रलोभन जैसे नए तरीकों को भी शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में “छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968” लागू है, जिसे राज्य गठन के बाद अपनाया गया था।


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