June 5, 2026 |

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Petrol-Diesel will become cheaper : नवरात्रि से पहले बड़ी खबर.. इतने रुपए सस्ता हो सकता है पेट्रोल और डीजल, जानें आज का रेट

Petrol-Diesel will become cheaper : कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की गुंजाइश मिली है।

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Petrol-Diesel will become cheaper : कच्चे तेल की कीमतों में हाल के हफ्ते में आई गिरावट से पेट्रोलियम कंपनियों के मुनाफे में सुधार हुआ है। इससे पब्ल्कि सेक्टर की तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की गुंजाइश मिली है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) ने गुरुवार को ये जानकारी दी। भारत द्वारा इंपोर्ट किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमत सितंबर में औसतन 74 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में 83-84 डॉलर प्रति बैरल थी।

पेट्रोल और डीजल के दाम में आखिरी बार हुई थी 2 रुपये की कटौती

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बार 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। इक्रा ने एक ‘नोट’ में कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ हाल के हफ्तों में भारतीय पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए मोटर व्हीकल फ्यूल की खुदरा बिक्री पर मार्केटिंग प्रॉफिट में सुधार हुआ है। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें वर्तमान स्तर पर स्थिर रहीं तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती की गुंजाइश है।

मार्च 2024 से यथावत है फ्यूल के RSP

इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और ग्रुप हेड गिरीश कुमार कदम ने कहा, ‘‘ इक्रा का अनुमान है कि सितंबर, 2024 (17 सितंबर तक) में अंतरराष्ट्रीय उत्पाद कीमतों की तुलना में OMCs की शुद्ध प्राप्ति पेट्रोल के लिए 15 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 12 रुपये प्रति लीटर ज्यादा रही। इन फ्यूल के खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) मार्च, 2024 से जस के तस बने हुए हैं (15 मार्च, 2024 को पेट्रोल और डीजल के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी) और ऐसा प्रतीत होता है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं तो उनके 2 से 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की गुंजाइश है।’’

कमजोर ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ की वजह से गिर रहे कच्चे तेल के दाम

कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में भारी गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण कमजोर ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ और उच्च अमेरिकी प्रोडक्शन है। वहीं ओपेक और सहयोगी देशों (ओपेक+) ने गिरती कीमतों से निपटने के लिए अपने उत्पादन कटौती को वापस लेने के अपने फैसले को दो महीने के लिए आगे बढ़ा दिया।


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