वाराणसी में गंगा का बढ़ा जलस्तर, नावों के संचालन पर रोक; प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

वाराणसी। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए वाराणसी प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर अगले आदेश तक गंगा में नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण प्रशासन ने घाटों पर निगरानी बढ़ा दी है और नाविकों के साथ-साथ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
64.70 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर
दशाश्वमेध के ACP डॉ. अतुल अंजन त्रिपाठी ने बताया कि जल पुलिस के अनुसार शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 64.70 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में करीब 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए नावों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फैसला लिया गया है।
प्रशासन और जल पुलिस की टीमें गंगा के जलस्तर और घाटों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालात सामान्य होने के बाद नावों के संचालन को दोबारा शुरू करने के संबंध में अलग से सूचना जारी की जाएगी।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील
नावों के संचालन पर रोक के साथ ही प्रशासन ने सभी नाविकों और संबंधित लोगों से सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। घाटों पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गहरे पानी में नहीं जाने और नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने का आग्रह किया है।
सरकार ने बदली बाढ़ संभावित क्षेत्र की परिभाषा
इसी बीच केंद्र सरकार ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के ‘सक्रिय बाढ़ संभावित क्षेत्र’ की परिभाषा में बदलाव किया है। सरकार ने बाढ़ की वापसी अवधि (रिटर्न पीरियड) के आधार पर नियामक और चेतावनी क्षेत्रों को परिभाषित किया है।
जल शक्ति मंत्रालय ने 7 अगस्त को जारी और 10 अगस्त को राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के जरिए ‘गंगा नदी (पुनरुद्धार, संरक्षण और प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016’ में संशोधन किया है।
हर पांच साल में बाढ़ आने वाले क्षेत्र को माना सक्रिय बाढ़ क्षेत्र
नए संशोधन में ‘निर्माण-मुक्त क्षेत्र’ शब्द को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारों तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों के रखरखाव पर जोर दिया गया है, ताकि प्रदूषण के स्रोतों और दबावों को कम किया जा सके और आवश्यक उपायों के जरिए प्राकृतिक भूजल संचय की क्षमता को सुरक्षित रखा जा सके। सरकार के अनुसार, ‘सक्रिय बाढ़ संभावित क्षेत्र’ से आशय गंगा या उसकी सहायक नदियों के उस क्षेत्र से है, जो हर पांच साल में एक बार आने वाली बाढ़ के दौरान पानी में डूब जाता है।




