
Cyber Fraud: रायपुर। साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए रायपुर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में डीडी नगर थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए जा रहे एक म्यूल अकाउंट से जुड़े आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के बैंक खाते में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित करीब 9 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
विभिन्न राज्यों से मिली थीं शिकायतें
पुलिस के अनुसार, पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर, रायपुर कमिश्नरेट को विभिन्न राज्यों से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एक बैंक खाते के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जिम्मेदारी डीडी नगर थाना पुलिस को सौंपी गई।
जांच में सामने आया साइबर ठगी का कनेक्शन
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि रायपुर के रायपुरा स्थित विकास विहार कॉलोनी निवासी मानव खत्री अपने बैंक खाते का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा ठगी से प्राप्त रकम को प्राप्त करने और निकालने के लिए कर रहा था। तकनीकी जांच में आरोपी के खाते से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के चार अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के बैंक खाते में करीब 9 लाख रुपये की ठगी की राशि का लेनदेन किया गया था।
गुजरात, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से दर्ज हुई शिकायतें
पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ गुजरात, ओडिशा और आंध्र प्रदेश से ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। प्राप्त शिकायतों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर डीडी नगर थाना में अपराध क्रमांक 358/2026 दर्ज किया गया।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4) और 317(5) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
न्यायिक रिमांड पर भेजा गया जेल
न्यायालय में पेशी के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी का साइबर ठगी गिरोह से कितना बड़ा नेटवर्क जुड़ा हुआ है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने के लिए करते हैं। इससे ठगी की रकम का स्रोत छिपाने में मदद मिलती है। पुलिस ऐसे खातों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है।




