Pitru Paksha 2024 : नई दिल्ली। पितरों को संतुष्ट करने के लिए पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध किए जाते हैं। इन 15 दिनों में नित्य जल दान व तिथि पर अन्न व वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। आज 19 सितंबर, गुरुवार के दिन पितृ पक्ष का दूसरा श्राद्ध (Shraddh) किया जा रहा है। पितृ पक्ष के दौरान पितरों की पूजा करना, तर्पण और पिंडदान करने का अत्यधिक महत्व होता है। पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने की भी कोशिश की जाती है ताकि घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहे।
द्वितीया तिथि का श्राद्ध
द्वितीया तिथि का श्राद्ध पितृपक्ष के दूसरे दिन किया जाता है। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु हिंदू पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि को होती है। द्वितीया तिथि के श्राद्ध कर्म में मुख्य रूप से पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा होती है। इस दिन परिवार के लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
द्वितीया तिथि पर श्राद्ध की विधि
पिंडदान: आटे, चावल, या जौ से बने पिंड (गोल आकार के गोले) बनाए जाते हैं, जो पितरों को अर्पित किए जाते हैं।
तर्पण: जल में तिल मिलाकर पितरों को अर्पित किया जाता है।
ब्राह्मण भोज: श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाना और दक्षिणा देना महत्वपूर्ण माना जाता है।
ध्यान और प्रार्थना: आखिर में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए ध्यान और प्रार्थना की जाती है। ताकि हमारे जीवन में सुख-शांति और संपन्नता सदैव बनी रहे।
पितृपक्ष के नियम और कर्म
पितृपक्ष में हम अपने पितरों को नियमित रूप से जल अर्पित करते हैं। यह जल दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दोपहर के समय दिया जाता है। जल में काला तिल मिलाया जाता है और हाथ में कुश रखा जाता है। पितृपक्ष में जिस दिन पूर्वज के देहांत की तिथि होती है, उस दिन अन्न और वस्त्र का दान किया जाता है। और उसी तिथि को किसी निर्धन या ब्राह्मण को भोजन भी कराया जाता है। इसके बाद पितृपक्ष के कर्मों का समापन हो जाता है।




