
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को फिर से खोलने के प्रयासों में अब भारत भी शामिल हो गया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि ब्रिटेन ने भारत को 35 देशों की एक अहम बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह बैठक गुरुवार को आयोजित होगी, जिसमें भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेंगे।
जानें, बैठक को लेकर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
जायसवाल ने कहा, ‘ब्रिटेन की ओर से भारत सहित कई देशों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है। हमारी ओर से विदेश सचिव आज शाम इस बैठक में शामिल हो रहे हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि भारत ईरान और अन्य संबंधित देशों के संपर्क में है, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और बिना रुकावट जारी रह सके। जायसवाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में बातचीत के जरिए भारत के 6 जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में LPG, LNG और अन्य जरूरी सामान ले जाया जा रहा था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है हॉर्मुज
हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की करीब 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। हाल ही में ईरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया था, जिसके बाद तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। भारत के लिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा है, क्योंकि देश का लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल, 50 फीसदी LNG और 80 फीसदी से ज्यादा LPG इसी रास्ते से आता है। उधर, कीर स्टार्मर ने बताया कि फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा और यूएई सहित 35 देशों ने समुद्री सुरक्षा बहाल करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
‘सभी कूटनीतिक, राजनीतिक उपायों पर विचार’
स्टार्मर ने कहा, ‘यह बैठक उन सभी कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों पर विचार करेगी, जिनसे समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाया जा सके, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरी सामान की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।’ उन्होंने आगे कहा कि बैठक के बाद मिलिट्री प्लानर्स के साथ भी चर्चा की जाएगी, ताकि संघर्ष खत्म होने के बाद इस जलमार्ग को सुरक्षित और चालू किया जा सके। यह बैठक ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में होगी। खबरों के मुताबिक, इसके बाद अधिकारियों के स्तर पर आगे की बैठकों का दौर भी चलेगा, जिसमें इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
‘अमेरिका अब आपकी मदद के लिए नहीं आएगा’
बता दें कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपने रुख में बदलाव करते हुए अमेरिका के सहयोगियों को खुद अपने तेल का इंतजाम करने की सलाह दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘जिन देशों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य के कारण जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है, जैसे यूनाइटेड किंगडम, उनके लिए मेरा सुझाव है- पहला, अमेरिका से खरीदें, हमारे पास काफी है, और दूसरा, हिम्मत दिखाएं, वहां जाएं और खुद नियंत्रण लें। आपको खुद लड़ना सीखना होगा, अमेरिका अब आपकी मदद के लिए नहीं आएगा।’




