June 6, 2026 |

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Paush Putrada Ekadashi 2025: 30 या 31 दिसंबर.. कब है साल की आखिरी एकादशी? जानें व्रत की सही तारीख और मुहूर्त

Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है।

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Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। कहते हैं कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के घर सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है। एकादशी व्रत करने वालों पर श्री हरि की खास कृपा रहती है। साथ ही देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद भी बना रहता है।

आपको बता दें कि प्रत्येक माह में दो बार एकादशी का व्रत किया जाता है एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। दोनों ही तिथि में आने वाली एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पौष माह में आने वाली पुत्रदा एकादशी अत्यंत ही फलदायी मानी जाती है। तो आइए जानते हैं कि साल 2025 की आखिरी एकादशी कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 2025 डेट

पुत्रदा एकादशी की तिथि को लेकर लोगों में असमजंस की स्थिति बनी हुई। एकादशी का व्रत 30 दिसंबर को रखना सही होगा या 31 दिसंबर को। तो बता दें कि पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 और 31 दिसंबर दोनों ही दिन रखा जाएगा। जब दो दिन एकादशी का व्रत पड़ता है तो गृहस्थ पहले दिन एकादशी का व्रत रखते हैं और दूसरे दिन वैष्णव संप्रदाय एकादशी का उपवास करते हैं।

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 पूजा शुभ मुहूर्त और पारण का समय (30 दिसंबर)

पंचांग के अनुसार,  पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि  का आरंभ 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि समाप्त 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5 बजे होगी। पौष पुत्रदा एकादशी का पारण 31 दिसंबर 2025 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ मुहूर्त 31 दिसंबर को दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

पौष पुत्रदा एकादशी बुधवार, 31 दिसंबर 2025

  • पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि  प्रारंभ-  30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर
  • पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त-  31 दिसंबर 2025 को सुबह 5 बजे तक
  • एकादशी पारण का समय- 1 जनवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 14 मिनट से सुबह 9 बजकर 18 मिनट तक

पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व

पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है। एक पौष माह में और दूसरा सावन महीने में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को सुंदर, स्वस्थ और बुद्धिमान संतान की प्राप्ति होती है। वहीं जिनकी पहले से संतान है उनके संतान की आयु लंबी होती है। इसके अलावा पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से धन, धान्य और ऐश्वर्य भी मिलता है।


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