
मुंबई। महाराष्ट्र में दूध खरीदने वाले उपभोक्ताओं को अब अपनी जेब कुछ ज्यादा ढीली करनी होगी। राज्य में गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। दूध के नए दाम 11 अगस्त 2026 से लागू होंगे। कीमतों में वृद्धि के बाद अब महाराष्ट्र में गाय का दूध 62 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 78 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलेगा। इससे पहले गाय के दूध की कीमत 60 रुपये और भैंस के दूध की कीमत 76 रुपये प्रति लीटर थी।
दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब दुग्ध उत्पादकों की लागत और दूध के परिवहन से जुड़ी लागत को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। डेयरी संचालकों का कहना है कि दूध को डेयरी और बाजार तक पहुंचाने में खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा किसानों से दूध एकत्र करने की लागत में भी इजाफा हुआ है।
11 अगस्त से लागू होंगे नए रेट
महाराष्ट्र में दूध के नए दाम 11 अगस्त से प्रभावी होंगे। यानी इस तारीख के बाद उपभोक्ताओं को गाय और भैंस दोनों के दूध के लिए पहले की तुलना में 2 रुपये अधिक चुकाने होंगे।
| दूध का प्रकार | पुराना रेट | नया रेट |
|---|---|---|
| गाय का दूध | ₹60/लीटर | ₹62/लीटर |
| भैंस का दूध | ₹76/लीटर | ₹78/लीटर |
दूध की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी होने के बावजूद राज्यभर में इसका सीधा असर रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर पड़ सकता है।
परिवहन और दूध संग्रह की बढ़ी लागत बनी वजह
डेयरी संचालकों के मुताबिक दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ी वजह बढ़ती परिचालन लागत है। दूध को गांवों और संग्रह केंद्रों से डेयरी प्लांट तक पहुंचाने के लिए पहले की तुलना में अधिक खर्च हो रहा है। इसके साथ ही किसानों से दूध इकट्ठा करने की लागत भी बढ़ी है।
डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि दूध उत्पादन और उसकी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते खर्च के बीच कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया था। हालांकि, कीमत बढ़ने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका भी है।
दूध पर MSP लागू करने का फिलहाल प्रस्ताव नहीं
दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर भी चर्चा होती रही है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने संसद में स्पष्ट किया था कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया था कि दूध की कीमतें फिलहाल सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा बाजार की परिस्थितियों के आधार पर तय की जाती हैं।
सरकार के अनुसार, दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा, दूध की कीमतों को स्थिर रखने, उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और देशभर में दूध की गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करने के लिए कई योजनाएं और पहल लागू की जा रही हैं।
दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र से जोड़ने पर जोर
सरकार ने संसद में बताया कि दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र से जोड़ने के लिए ग्राम स्तर पर डेयरी सहकारी समितियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक ग्राम स्तर पर 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां (DCS) स्थापित की गईं, जबकि 31,150 मौजूदा समितियों को मजबूत किया गया। इसके अलावा प्रतिदिन 168 लाख लीटर दूध की शीतलन क्षमता विकसित की गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि दूध की गुणवत्ता जांच के लिए 76,748 गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। वहीं प्रतिदिन 418 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
10 साल में करीब 69 फीसदी बढ़ा दूध उत्पादन
सरकार के मुताबिक भारत में दूध उत्पादन में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2024-25 में देश का कुल दूध उत्पादन 248 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) रहा, जबकि 2014-15 में यह आंकड़ा 146 MMT था। यानी इस अवधि में दूध उत्पादन में करीब 69 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
सरकार ने दूध उत्पादन में इस वृद्धि के लिए नस्ल सुधार, आनुवंशिक उन्नयन, मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान, लिंग-चयनित वीर्य और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी पहलों को प्रमुख कारण बताया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार देश में अब तक 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं। इससे कृत्रिम गर्भाधान का कवरेज 20 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी हुआ है और दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के लिए अहम फैसला
महाराष्ट्र में दूध के दाम बढ़ने का सीधा असर जहां उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, वहीं डेयरी क्षेत्र इसे बढ़ती लागत के बीच जरूरी कदम बता रहा है। दूध रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा होने के कारण कीमतों में बदलाव का असर चाय, दही, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की लागत पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल 11 अगस्त से गाय के दूध की कीमत 62 रुपये और भैंस के दूध की कीमत 78 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। आने वाले दिनों में दूध की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं, डेयरी संचालकों और दुग्ध उत्पादकों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।




