June 4, 2026 |

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महानदी जल विवाद सुलझने की ओर: छत्तीसगढ़-ओडिशा की संयुक्त रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश, 30 मई को अगली सुनवाई

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Mahanadi Water Dispute Nears Resolution: रायपुर | छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों से जारी महानदी जल बंटवारे का विवाद के निपटारे के आसार बढ़ गए हैं। शनिवार को महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के सामने महानदी में पानी की उपलब्धता पर दोनों राज्यों की एक संयुक्त रिपोर्ट पेश की गई है। विशेषज्ञ इस संयुक्त तकनीकी रिपोर्ट को लंबे समय से चले आ रहे विवाद के निपटारे में ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं।
गत 20 अप्रैल को ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को चेतावनी देते हुए विवाद के समाधान के लिए कदम उठाने का आखिरी मौका दिया था। ट्रिब्यूनल ने कदम नहीं उठाने पर गुण दोष आधारित निर्णय लेने की बात भी कही थी।

ट्रिब्यूनल ने सराहना की
इधर, संयुक्त रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों की ओर से विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। मामले की अगली सुनवाई 30 मई को तय की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों राज्यों में कई मुद्दों पर आम सहमति बन गई है। दोनों ही राज्य मतभेद के अन्य बिंदुओं को सुलझाने पर काम कर रहे हैं।

क्या है महानदी जल बंटवारा विवाद
महानदी छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले से निकलती है और ओडिशा से होते हुए आखिर में बंगाल की खाड़ी में मिलती है। यह इस क्षेत्र की एक अहम नदी प्रणाली है और 2016 से ही इसके पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद चल रहा है।

क्या है छत्तीसगढ़ का दावा
दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ की दलील है कि राज्य में नदी का जलग्रहण क्षेत्र बहुत बड़ा है, इसलिए नदी के पानी का इस्तेमाल करना उसका अपना अधिकार है। छत्तीसगढ़ ने यह भी बताया कि ओडिशा ने ऊपरी हिस्से में पड़ने वाले राज्य के तौर पर उसे बिना कोई जानकारी दिए ही कुछ बड़े और मंझोले प्रोजेक्ट शुरू कर दिए थे।

विवाद सुलझाने की टाइमलाइन
वर्ष 2016- केंद्र सरकार ने त्रिपक्षीय बैठक के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की। बैठक में ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और छत्तीसगढ़ के तत्कालील मुख्यमंत्री रमन सिंह शामिल हुए थे। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री, उमा भारती ने बैठक की अध्यक्षता की थी।
वर्ष 2016- जल बंटवारा विवाद दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। ओडिशा की तत्कालीन बीजद सरकार ने अनुच्छेद 131 के तहत मूल मुकदमा दायर किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के खिलाफ एक निषेधाज्ञा की मांग करते हुए नदी के किनारे बैराज बनाने से रोका जाने की मांग की गई।ओडिशा ने अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत ट्रिब्यूनल की मांग भी की। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ नदी पर चल रही परियोजनाओं की देखरेख और जल बंटवारे के लिए संयुक्त नियंत्रण बोर्ड के पक्ष में था। छत्तीसगढ़ का यह रुख वर्ष 1983 में ओडिशा और मध्य प्रदेश (जिसमें से छत्तीसगढ़ को वर्ष 2000 में अलग करके बनाया गया था) के बीच हुए एक समझौते के अनुरूप था।
वर्ष 2018- सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 में केंद्र सरकार को ट्रिब्यूनल के गठन का आदेश दिया।
वर्ष 2018-केंद्र ने तीन सदस्यों वाले महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया।
वर्ष 2024- ओडिशा में वर्ष 2024 में भाजपा की सरकार बनने के बाद कानूनी समझौते को लेकर ओडिशा का रुख बदल गया।
वर्ष 2025-ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अगस्त 2025 में अपने छत्तीसगढ़ी समकक्ष विष्णु देव साय को परस्पर लाभकारी समझौते के लिए पत्र लिखा। साय ने भी सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव सक्रिय विचार-विमर्श के अधीन है।


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