September 12, 2026 |

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Health Tips: पपीते के पत्तों का रस कितना फायदेमंद? पाचन से लेकर डेंगू तक के दावों की जानिए सच्चाई

पपीते में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, लेकिन पपीते के पत्तों का रस किसी बीमारी का इलाज नहीं; डेंगू में डॉक्टर की निगरानी जरूरी

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हेल्थ डेस्क। पपीता आमतौर पर पोषक फलों में शामिल किया जाता है। इसमें फाइबर, विटामिन C, बीटा-कैरोटीन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे संतुलित आहार का हिस्सा माना जाता है। हालांकि, पपीते के पत्तों के रस को लेकर सोशल मीडिया और घरेलू नुस्खों में कई तरह के दावे किए जाते हैं। खासतौर पर डेंगू के दौरान प्लेटलेट बढ़ाने के लिए इसके इस्तेमाल की चर्चा होती है।

पपीते के पत्तों के अर्क पर कुछ क्लिनिकल अध्ययनों में डेंगू मरीजों के प्लेटलेट काउंट में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। एक रैंडमाइज्ड ट्रायल में पपीते के पत्तों के अर्क लेने वाले मरीजों में प्लेटलेट बढ़ने की दर नियंत्रण समूह की तुलना में अधिक पाई गई। हालांकि, उपलब्ध शोध अभी इतना मजबूत नहीं है कि पपीते के पत्तों के रस को डेंगू का प्रमाणित इलाज माना जाए। एक व्यवस्थित समीक्षा में भी प्लेटलेट काउंट में सुधार के संकेत मिले, लेकिन शोधकर्ताओं ने बेहतर गुणवत्ता वाले बड़े अध्ययनों की जरूरत बताई है।

पपीते में क्या-क्या पोषक तत्व होते हैं?

पपीता फाइबर और कई विटामिन का अच्छा स्रोत है। इसमें विटामिन C और बीटा-कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। पर्याप्त फाइबर वाला संतुलित आहार सामान्य पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, केवल पपीता खाने से कब्ज, बढ़ा हुआ वजन या त्वचा संबंधी समस्या अपने आप ठीक हो जाएगी, ऐसा दावा करना सही नहीं होगा। इन समस्याओं के कई कारण हो सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

पपीते के पत्तों और डेंगू को लेकर क्या कहती है रिसर्च?

पपीते के पत्तों के अर्क पर हुए कई अध्ययनों में डेंगू के दौरान प्लेटलेट काउंट में बढ़ोतरी देखी गई है। एक अध्ययन में 228 डेंगू मरीजों को शामिल किया गया था और पपीते के पत्तों का रस लेने वाले समूह में प्लेटलेट काउंट में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वहीं, बाद की व्यवस्थित समीक्षा में भी कुछ अध्ययनों में प्लेटलेट काउंट बढ़ने की बात सामने आई, लेकिन शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया कि केवल प्लेटलेट बढ़ने से यह साबित नहीं होता कि बीमारी की गंभीर जटिलताओं या मृत्यु का जोखिम भी कम होता है। इसलिए पपीते के पत्तों के रस को डेंगू के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। डेंगू में चिकित्सकीय निगरानी और डॉक्टर द्वारा बताई गई उपचार व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है।

क्या पपीते के पत्तों का रस प्लेटलेट बढ़ाता है?

कुछ शोधों में इसका सकारात्मक असर सामने आया है, लेकिन इसका प्रभाव हर मरीज में समान होगा, यह निश्चित नहीं है। साथ ही अलग-अलग अध्ययनों में पपीते के पत्तों के अर्क की मात्रा और रूप भी अलग रहे हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के घर पर तैयार किए गए पपीते के पत्तों के रस की कोई निश्चित मात्रा तय करके पीना उचित नहीं है। खासकर बच्चों, गर्भवती लोगों या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को किसी भी हर्बल उपाय का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

पपीते के पत्तों के रस को लेकर सावधानी जरूरी

पपीते के पत्तों के अर्क से जुड़े कुछ अध्ययनों में मतली और उल्टी जैसे पेट संबंधी दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं। इसलिए इसे पूरी तरह जोखिम-मुक्त घरेलू नुस्खा मानना सही नहीं है। डेंगू के मरीज में प्लेटलेट कम होना बीमारी का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन मरीज की स्थिति का आकलन केवल प्लेटलेट संख्या से नहीं किया जाता। बुखार, रक्तस्राव, पेट दर्द, लगातार उल्टी, कमजोरी या अन्य चेतावनी संकेत दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

क्या पपीते के पत्तों का रस डेंगू की दवा है?

नहीं। वर्तमान उपलब्ध प्रमाण पपीते के पत्तों के अर्क को संभावित सहायक उपाय के रूप में देखते हैं, लेकिन इसे डेंगू की प्रमाणित दवा या मुख्य उपचार नहीं माना जा सकता। शोध में इसके संभावित लाभ के संकेत जरूर मिले हैं, पर निर्णायक निष्कर्ष के लिए बेहतर और बड़े क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है। इसलिए डेंगू होने पर घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। पपीता सामान्य आहार के रूप में लिया जा सकता है, जबकि पपीते के पत्तों के अर्क या रस का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नमस्कार मध्यप्रदेश न्यूज किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)


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