July 29, 2026 |

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CG Jagdalpur News: AI ने खोली बस्तर पुलिस के 2 करोड़ के वेतन घोटाले की पोल, तीन आरक्षक गिरफ्तार

Namaskar Madhya Pradesh

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CG Jagdalpur News: जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में पुलिस विभाग के भीतर करीब दो करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा मामला कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- AI) आधारित ऑडिट के दौरान सामने आया। शुरुआती जांच में पता चला है कि वेतन रिकॉर्ड में हेराफेरी कर सरकारी खजाने से करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक की राशि अवैध रूप से निकाली गई। मामले में पुलिस ने तीन आरक्षकों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

बस्तर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के अनुसार पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आंतरिक और बाहरी ऑडिट कराया गया था। ऑडिट के दौरान पहली बार एआई आधारित विश्लेषण का इस्तेमाल किया गया, जिसमें वेतन भुगतान के आंकड़ों में असामान्य बढ़ोतरी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों ने वेतन रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और डिजिटल दस्तावेजों की विस्तृत जांच की, जिसमें करोड़ों रुपये के कथित गबन का खुलासा हुआ।

AI ऑडिट में सामने आई करोड़ों की गड़बड़ी

जांच में पता चला कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन शाखा में सहायक के रूप में पदस्थ आरक्षक गिरीश राय वेतन तैयार होने से पहले उसकी सॉफ्ट कॉपी में बदलाव करता था। इसके बाद वह अपना और दो अन्य आरक्षकों राजकुमार कतलम तथा हेमंत मैथ्यू का वेतन बढ़ाकर अतिरिक्त राशि सरकारी खाते से निकलवा लेता था।

पुलिस के अनुसार यह फर्जीवाड़ा अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच लगातार चलता रहा। इस अवधि में सरकारी खाते से करीब 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक की राशि अवैध रूप से निकाली गई। पूछताछ के दौरान गिरीश राय ने रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की बात स्वीकार कर ली है।

गिरीश राय को माना जा रहा मास्टरमाइंड

जांच एजेंसियों के अनुसार वर्ष 2012 से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ गिरीश राय इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड है। उसकी नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी और वेतन शाखा में होने के कारण उसे वेतन तैयार करने और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी।

इसी जानकारी का फायदा उठाकर वह वेतन की सॉफ्ट कॉपी में बदलाव करता था और अतिरिक्त राशि अपने तथा अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर करा लेता था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में अन्य कर्मचारियों की भूमिका रही है या नहीं।

‘लोन’ के नाम पर भी किया गया फर्जीवाड़ा

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, गिरीश राय कुछ कर्मचारियों का वेतन यह कहकर बढ़ा देता था कि उन्हें विभागीय लोन दिया जा रहा है। बाद में वह उसी अतिरिक्त राशि को लोन की किस्त या वापसी के नाम पर नकद वापस ले लेता था।

पुलिस ने ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर ली है, जिनके वेतन में इस प्रकार बदलाव किया गया था। अब उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे इस कथित साजिश में शामिल थे या उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं थी।

तीन साल तक क्यों नहीं हुआ किसी को शक?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पुलिस विभाग में हर महीने कर्मचारियों के तबादले, नई नियुक्तियां, पदोन्नति और संख्या में बदलाव होते रहते हैं। इसी कारण वेतन खर्च में होने वाले उतार-चढ़ाव को सामान्य माना जाता रहा।

आरोपियों ने भी इसी स्थिति का फायदा उठाया। वे हर महीने वेतन में थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी करते रहे, जिससे एक साथ बड़ी राशि की निकासी का संदेह नहीं हुआ। यही वजह रही कि कथित गड़बड़ी करीब तीन वर्षों तक सामने नहीं आ सकी।

AI ने ऐसे खोला पूरा राज

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस विभाग में पहली बार एआई आधारित ऑडिट कराया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स ने वेतन भुगतान के पैटर्न का विश्लेषण किया और असामान्य वृद्धि की पहचान की। इसके बाद जांच टीम ने डिजिटल रिकॉर्ड, वेतन की सॉफ्ट कॉपी और बैंक लेन-देन का मिलान किया, जिससे कथित फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।

पुलिस का कहना है कि यदि पारंपरिक तरीके से ऑडिट किया जाता तो इस तरह की गड़बड़ी पकड़ में आने में और अधिक समय लग सकता था।

धोखाधड़ी और गबन सहित कई धाराओं में केस दर्ज

मामले के खुलासे के बाद 29 जून को जगदलपुर थाने में तीनों आरक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अगले दिन आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पूरे वेतन भुगतान सिस्टम की समीक्षा कर भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए डिजिटल निगरानी और एआई आधारित ऑडिट को और मजबूत किया जाएगा।


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