Independence Day: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान, देशभर में बनाई जाएंगी 6 करोड़ लखपति दीदी
80th Independence Day: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया।

80th Independence Day: नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया। अपने भाषण की शुरुआत प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ और तिरंगे के जिक्र के साथ की। उन्होंने कहा कि आज हर दिल में वंदे मातरम् की गूंज है, हर घर में तिरंगा है और हर मन में तिरंगा बस गया है।
स्वतंत्रता दिवस के इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने देशभर में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब इससे आगे बढ़ते हुए 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
3 करोड़ महिलाओं ने हासिल किया लक्ष्य
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 तक 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा चुका था। अब सरकार का लक्ष्य 3 करोड़ और महिलाओं को स्थायी एवं विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़ना है, ताकि उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को केवल अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
क्या है लखपति दीदी योजना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले से अपने संबोधन में लखपति दीदी पहल की घोषणा की थी। इसे वर्ष 2024 में आगे बढ़ाया गया। योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय को 1 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंचाना है।
इस पहल को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत लागू किया जा रहा है। महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के स्रोतों में विविधता लाने और उन्हें स्थायी आमदनी के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है।
कौन होती हैं ‘लखपति दीदी’?
‘लखपति दीदी’ ऐसी महिला होती है जो स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हो और जिसके परिवार की वार्षिक आय कम से कम 1 लाख रुपये हो। इस आय को केवल किसी एक समय की कमाई के आधार पर नहीं माना जाता। आय की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए इसे कम से कम चार कृषि मौसम और/या व्यावसायिक चक्रों के दौरान देखा जाता है। इस अवधि में औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से अधिक रहने की शर्त रखी गई है। यानी योजना का उद्देश्य महिलाओं को एक बार की आय के बजाय लगातार और टिकाऊ आमदनी के साधन उपलब्ध कराना है।
कई क्षेत्रों में आजीविका के अवसर
लखपति दीदी पहल के तहत महिलाओं को कृषि, पशुपालन, छोटे कारोबार, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए योजना, परिसंपत्ति, वित्त, बाजार और तकनीक से संबंधित आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस पहल में केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों, मंत्रालयों, निजी क्षेत्र और बाजार से जुड़े संस्थानों के बीच समन्वय पर भी जोर दिया जाता है।
महिलाओं की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार की रणनीति का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार से जोड़ना है। इससे महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य सामने रखकर महिला आर्थिक सशक्तिकरण को विकसित भारत के एजेंडे से जोड़ने का संदेश दिया। सरकार का जोर अब अधिक महिलाओं को स्थायी आजीविका से जोड़ने और उनकी आय में निरंतर बढ़ोतरी सुनिश्चित करने पर रहेगा।



