
Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ की नई राजधानी नवा रायपुर में लगभग 54 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अत्याधुनिक सरकारी इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल नवंबर 2026 तक बनकर तैयार होने की संभावना है। सेक्टर-32 में करीब 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण पिछले चार वर्षों से जारी है। भवन का अधिकांश कार्य पूरा होने के करीब पहुंच चुका है, लेकिन विद्यालय किस शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई, आईबी, कैम्ब्रिज या अन्य) से संचालित होगा, इस पर सरकार अब तक अंतिम निर्णय नहीं ले सकी है। इसके साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यार्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया भी अभी तय नहीं हुई है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा आवासीय विद्यालय
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह स्कूल प्रदेश के सबसे आधुनिक सरकारी आवासीय विद्यालयों में शामिल होगा। यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
परियोजना के पहले चरण में अत्याधुनिक अकादमिक भवन, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, प्रशासनिक भवन, छात्रावास, डाइनिंग हॉल, इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग सुविधा और खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। दूसरे चरण में ऑडिटोरियम, अतिरिक्त छात्रावास और अन्य आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा।
2023 में शुरू होना था संचालन, निर्माण में हुई देरी
इस परियोजना की घोषणा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में की गई थी। शिक्षक दिवस 2022 के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसका वर्चुअल शिलान्यास किया था। उस समय सरकार ने दावा किया था कि वर्ष 2023 से एक हजार विद्यार्थियों की क्षमता वाले इस इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
हालांकि निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो सका, जिसके कारण परियोजना में देरी हुई। अब उम्मीद जताई जा रही है कि नवंबर 2026 तक भवन तैयार हो जाएगा।
विधानसभा में उठा था मामला
हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इस परियोजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति को लेकर सवाल उठाया था। इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि परियोजना को 5 अक्टूबर 2021 को प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी और 10 सितंबर 2022 से निर्माण कार्य शुरू हुआ।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना की स्वीकृत लागत 49.52 करोड़ रुपये है, जबकि अब तक 35.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। (निर्माण लागत और कुल परियोजना लागत के विभिन्न सरकारी दस्तावेजों में अलग-अलग आंकड़े दर्ज हैं।)
शिक्षा बोर्ड और भर्ती पर सरकार को लेना होगा फैसला
विद्यालय भवन तैयार होने के साथ सबसे बड़ा सवाल इसके संचालन को लेकर है। अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि स्कूल किस शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होगा। साथ ही शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रवेश प्रक्रिया, फीस संरचना (यदि लागू हो) और संचालन मॉडल पर भी सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा, ताकि भवन तैयार होने के बाद विद्यालय को शीघ्र शुरू किया जा सके।
700 विद्यार्थियों के अध्ययन और 328 के आवास की व्यवस्था
सरकार के अनुसार, वर्तमान डिजाइन के तहत विद्यालय में 700 विद्यार्थियों के अध्ययन और 328 विद्यार्थियों के आवास की व्यवस्था की जा रही है। भविष्य में दूसरे चरण का निर्माण पूरा होने के बाद इसकी क्षमता और बढ़ाई जा सकती है। यह विद्यालय राज्य के मेधावी विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



