September 21, 2026 |

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Krishna Janmashtami 2026: आज रात 11:57 बजे से शुरू होगी कान्हा की पूजा, जानें शहरवार शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय

जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग, मध्यरात्रि 12:20 बजे जन्माष्टमी का क्षण; मथुरा-वृंदावन से मुंबई तक जानें पूजा का सही समय

Namaskar Madhya Pradesh

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Krishna Janmashtami 2026 Puja Muhurat: नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी तिथि की शुरुआत 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से हो चुकी है और इसका समापन देर रात 12 बजकर 13 मिनट पर होगा। वहीं रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।

जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय बेहद शुभ माना जाता है। दिए गए पंचांग के अनुसार पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। जन्माष्टमी का मध्यरात्रि क्षण रात 12 बजकर 20 मिनट पर होगा। वहीं चंद्रोदय का समय रात 11 बजकर 29 मिनट बताया गया है।

शहर के अनुसार जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

नोएडा: रात 11:57 बजे से 12:42 बजे तक
नई दिल्ली: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक
चेन्नई: रात 11:45 बजे से 12:31 बजे तक
जयपुर: रात 12:03 बजे से 12:49 बजे तक
पुणे: रात 12:10 बजे से 12:57 बजे तक
हैदराबाद: रात 11:52 बजे से 12:38 बजे तक
गुरुग्राम: रात 11:58 बजे से 12:44 बजे तक
चंडीगढ़: रात 11:59 बजे से 12:45 बजे तक
कोलकाता: रात 11:13 बजे से 11:59 बजे तक
मुंबई: रात 12:14 बजे से 1:01 बजे तक
बेंगलुरु: रात 11:55 बजे से 12:42 बजे तक
अहमदाबाद: रात 12:16 बजे से 1:02 बजे तक
जम्मू: रात 12:07 बजे से 12:52 बजे तक
मथुरा-वृंदावन: रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक

जन्माष्टमी व्रत का पारण कब होगा?

धर्म शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी व्रत का पारण 5 सितंबर 2026 की सुबह 6 बजकर 8 मिनट के बाद किया जा सकता है। वहीं समाज में प्रचलित मान्यता के अनुसार कुछ लोग 4 सितंबर की देर रात 12 बजकर 52 मिनट के बाद भी व्रत का पारण करते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार पारण का समय देखना चाहिए।

कैसे करें जन्माष्टमी की पूजा?

जन्माष्टमी की रात शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। सबसे पहले बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें और इसके बाद साफ जल से स्नान कराएं। भगवान को नए और सुंदर वस्त्र पहनाएं। पूजा में मोरपंख अर्पित करें और विधि-विधान से पूजन करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को तिलक लगाकर माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें। भगवान के मंत्रों और चालीसा का जाप करें तथा अंत में आरती उतारें। पूजा पूरी होने के बाद भगवान से जाने-अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

जन्माष्टमी की रात श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का इंतजार करते हुए भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना करते हैं। मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के बाद आरती और प्रसाद वितरण के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है।


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