September 16, 2026 |

BREAKING NEWS

ब्रेकिंगमध्यप्रदेश

किसानों के लिए जरूरी खबर, सरकार ने खाद की बिक्री पर लगाई रोक, आदेश जारी

राज्य सरकार ने 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से आगामी आदेश तक उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगा दी है।

Namaskar Madhya Pradesh

Listen to this article

भोपाल। मध्यप्रदेश में खरीफ सीजन के बीच किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक ओर कई जिलों में बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से आगामी आदेश तक उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगा दी है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के करीब 82 लाख पंजीकृत किसानों के प्रभावित होने की आशंका है। खासतौर पर धान समेत अन्य खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है।

क्यों लगाई गई खाद बिक्री पर रोक?

किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के आदेश के मुताबिक, भारत सरकार के iFMS पोर्टल पर दर्ज उर्वरक स्टॉक और प्रदेश के खाद विक्रेताओं के वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान किया जाना है। इसी प्रक्रिया के मद्देनजर प्रदेश में उर्वरकों की बिक्री आगामी आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

विभाग ने सभी संबंधित संस्थाओं और उर्वरक बिक्री केंद्रों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल खाद की बिक्री दोबारा कब शुरू होगी, इसकी कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

इन केंद्रों पर भी लागू रहेगा प्रतिबंध

खाद बिक्री बंद रखने का आदेश प्रदेश के प्रमुख उर्वरक वितरण केंद्रों पर लागू रहेगा। इनमें विपणन संघ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां, एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री केंद्र शामिल हैं।

आदेश के अनुसार, बिक्री बंद रहने की अवधि में अनुदानित उर्वरकों की बिक्री नहीं की जाएगी। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर आदेश का उल्लंघन न हो।

खरीफ सीजन में बढ़ सकती है किसानों की परेशानी

सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में खरीफ फसलों की बोवनी हो चुकी है और फसलें बढ़ने के साथ किसानों को यूरिया समेत अन्य उर्वरकों की आवश्यकता पड़ रही है। यदि बिक्री पर रोक लंबी खिंचती है तो उन किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिन्हें फसल के मौजूदा चरण में खाद की जरूरत है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रदेश में कितने किसानों को तत्काल उर्वरक की आवश्यकता है या किसानों के पास कितने समय के लिए खाद का स्टॉक उपलब्ध है।

ई-टोकन व्यवस्था के विरोध के बाद अब खाद बिक्री पर रोक

खाद बिक्री पर रोक का फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में किसान पहले ही ई-टोकन व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। किसानों ने 28 और 29 जुलाई को नर्मदापुरम से भोपाल तक पैदल मार्च कर दो दिन आंदोलन किया था।

ऐसे में अब खाद की बिक्री पर आगामी आदेश तक रोक लगाए जाने से किसान संगठनों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फसल सरकार के अगले आदेश का इंतजार नहीं करती। जिस समय फसल को खाद की जरूरत होती है, उसी समय किसानों को उर्वरक उपलब्ध होना चाहिए।

किसान नेता शिवकुमार शर्मा ने फैसले पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ ने खाद बिक्री रोकने के फैसले को गलत बताया है। उनका कहना है कि स्टॉक मिलान के नाम पर खाद की बिक्री बंद करना उचित नहीं है।

कक्काजी के मुताबिक, इस समय किसानों को फसल के लिए यूरिया और अमोनियम सल्फेट जैसे उर्वरकों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फसल अपनी जरूरत के हिसाब से चलती है, वह सरकार के आगामी आदेश का इंतजार नहीं करती। समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से फसल की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।

कालाबाजारी का खतरा बढ़ने की आशंका

खाद की अधिकृत बिक्री बंद रहने के दौरान किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है। यदि किसानों को अधिकृत केंद्रों से खाद नहीं मिलती है तो वे निजी बाजार का रुख कर सकते हैं, जहां महंगे दाम पर उर्वरक बेचने की स्थिति बन सकती है।

हालांकि, फिलहाल प्रदेश में खाद की कालाबाजारी शुरू होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे मौजूदा स्थिति में संभावित खतरे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

कलेक्टरों और अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

सरकार ने आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी कलेक्टरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में उर्वरक बिक्री पर लगी रोक का पालन कराने के साथ ही स्टॉक मिलान की प्रक्रिया पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

स्टॉक मिलान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खाद बिक्री को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, यह प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी और खाद की बिक्री दोबारा कब शुरू होगी, इसे लेकर फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा जारी नहीं की गई है।

प्रदेश में करीब 82 लाख पंजीकृत किसान

मध्यप्रदेश सरकार के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 82 लाख पंजीकृत किसान हैं। राज्य में लगभग 152 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है। ऐसे में खरीफ सीजन के बीच खाद की बिक्री पर रोक का असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है।

अब किसानों की नजर सरकार के अगले आदेश पर है। किसानों को उम्मीद है कि स्टॉक मिलान की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और उन्हें खरीफ फसलों के लिए आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध कराया जाएगा।


Namaskar Madhya Pradesh

Related Articles

Check Also
Close