July 29, 2026 |

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रेप मामले में अहम फैसला, कहा- बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप नहीं

Namaskar Madhya Pradesh

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CG High Court News: बिलासपुर। रेप के एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले की काफी चर्चा हो रही है. हाई कोर्ट ने कहा, अगर पुरुष जननांग को केवल महिला के जननांग पर रखा जाए और बिना प्रवेश (पेनिट्रेशन) के स्खलन होता है तो इसे रेप नहीं माना जाएगा. रेप के अपराध के लिए पेनिट्रेशन जरूरी है. केवल स्खलन पर्याप्त नहीं है. ऐसे मामले को रेप की कोशिश माना जाएगा.

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ ने कहा, किसी कृत्य को रेप की कैटेगरी में रखने के लिए यह साबित होना चाहिए कि आरोपी का इरादा विरोध के बावजूद शारीरिक संबंध बनाने का था. अगर पेनिट्रेशन सिद्ध नहीं होता तो अपराध की प्रकृति बदल जाती है.

क्या है पूरा मामला?

21 मई 2004 को आरोपी पीड़िता को जबरन अपने घर ले गया. वहां उसके साथ रेप किया. इसके बाद कमरे में बंद कर दिया. मामले में एफआईआर दर्ज हुई और जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई. इस केस में धमतरी की सत्र अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया. इसके बाद अपील पर सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान में यह सामने आया कि आरोपी ने अपना निजी अंग उसके जननांग पर रखा था लेकिन प्रवेश नहीं हुआ.

इसलिए अपराध को रेप की कोशिश माना

इसके साथ ही मेडिकल जांच में हाइमन सुरक्षित पाया गया. डॉक्टर ने स्पष्ट राय नहीं दी. हालांकि पार्शियल पेनिट्रेशन की संभावना से इनकार भी नहीं किया. जांच में पीड़िता के वस्त्रों पर स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई. इन तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए अपराध को रेप से बदलकर रेप की कोशिश माना.

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादास्पद आदेश को रद्द किया है. जिसमें उच्च न्यायालय ने कहा था कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना बलात्कार करने की केवल तैयारी है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विवादित आदेश को आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों के स्पष्ट रूप से गलत प्रयोग की वजह से रद्द किया जाना चाहिए.


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