July 29, 2026 |

BREAKING NEWS

छत्तीसगढ़देशब्रेकिंग

CG High Court: नक्सल केस में आरोपियों की डिफॉल्ट बेल बरकरार, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील की खारिज

Namaskar Madhya Pradesh

Listen to this article

CG High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नारायणपुर के चर्चित नक्सल प्रकरण में आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 182 दिन की देरी को गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि केवल सरकारी प्रक्रियाओं और फाइलों के लंबित रहने का हवाला देकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता।

दरअसल, मामला नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध से जुड़ा है। इस प्रकरण में चंपा कर्मा, मांगी मंडावी, संकू मंडावी और लच्छू मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

विशेष न्यायाधीश, एनआईए एक्ट एवं अनुसूचित अपराध न्यायालय, नारायणपुर ने 11 सितंबर 2025 और 24 सितंबर 2025 को आरोपियों को डिफॉल्ट बेल प्रदान की थी। राज्य सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अपील निर्धारित समयसीमा से 182 दिन देरी से दाखिल की गई।

“रेड टेप” के आधार पर नहीं मिल सकती राहत : हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि विधि एवं विधायी कार्य विभाग से प्रस्ताव आने, शासन की मंजूरी मिलने और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने में समय लग गया। शासन की बहुस्तरीय प्रक्रिया के कारण विलंब हुआ।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानून की समयसीमा सभी पर समान रूप से लागू होती है। सरकारी विभागों को केवल फाइल प्रक्रिया या “रेड टेप” का हवाला देकर राहत नहीं दी जा सकती।

देरी माफी अधिकार नहीं, अपवाद : कोर्ट

खंडपीठ ने पोस्टमास्टर जनरल बनाम लिविंग मीडिया इंडिया लिमिटेड और स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश बनाम रामकुमार चौधरी मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि देरी माफी कोई अधिकार नहीं बल्कि अपवाद है। इसके लिए ठोस, विश्वसनीय और संतोषजनक कारण होना आवश्यक है।

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार देरी का कोई पर्याप्त कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी। सिर्फ यह कहना कि फाइल विभिन्न विभागों में लंबित रही, स्वीकार्य नहीं है। सरकारी विभागों पर समयसीमा के भीतर गंभीरता और तत्परता से कार्य करने की विशेष जिम्मेदारी होती है।

अंततः हाईकोर्ट ने 182 दिन की देरी माफ करने से इनकार करते हुए देरी माफी आवेदन खारिज कर दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार की अपील भी समयसीमा से बाधित मानते हुए स्वतः निरस्त हो गई।


Namaskar Madhya Pradesh

Related Articles

Check Also
Close