
Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए सुरक्षित एवं विस्तृत प्राकृतिक आवास तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वन विभाग ने मध्य प्रदेश से पांच बाघ लाने की योजना पर काम तेज कर दिया है। इसके साथ ही राज्य के विभिन्न टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में बसे वनग्रामों का चरणबद्ध और स्वैच्छिक पुनर्वास भी किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से बाघों और अन्य वन्यजीवों को निर्बाध विचरण क्षेत्र मिलेगा तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वनग्राम को ग्रामसभा की सहमति के बिना नहीं हटाया जाएगा। पुनर्वास पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और प्रभावित परिवारों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
157 परिवारों के पुनर्वास की तैयारी
वन विभाग के अनुसार अचानकमार टाइगर रिजर्व के बिरापानी, छिरहट्टा और तिलईडबरा गांवों के 157 परिवारों का पुनर्वास प्रस्तावित है। वहीं उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करीब 50 वनग्रामों को भी चिन्हित किया गया है, जहां चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
वन अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास के बाद इन क्षेत्रों में बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए बड़ा और सुरक्षित जंगल उपलब्ध होगा, जिससे उनकी संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश से आएंगी तीन बाघिन, दो बाघ का प्रस्ताव भी तैयार
राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश से तीन बाघिन लाने की प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इन्हें अचानकमार और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा।
इसके अलावा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के लिए दो बाघ लाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद छत्तीसगढ़ में कुल पांच नए बाघों की आमद होगी, जिससे राज्य में बाघ संरक्षण अभियान को नई गति मिलेगी।
बारनवापारा अभयारण्य में भी बनेगी पुनर्वास योजना
टाइगर रिजर्व के अलावा बारनवापारा अभयारण्य में भी वनग्रामों के पुनर्वास की तैयारी शुरू कर दी गई है। अभयारण्य के भीतर वर्तमान में 22 से 25 वनग्राम बसे हुए हैं, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रहते हैं।
वन विभाग यहां भी ग्रामीणों की सहमति और पुनर्वास नीति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से गांवों को स्थानांतरित करने की योजना पर काम कर रहा है।
पहले भी हो चुका है सफल पुनर्वास
बारनवापारा अभयारण्य में इससे पहले रामपुर, लाटादादर और नयापारा गांवों के 399 परिवारों का सफलतापूर्वक पुनर्वास महासमुंद क्षेत्र में किया जा चुका है। वन विभाग का दावा है कि इस पुनर्वास से ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलीं और वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिली।
अब शेष वनग्रामों को भी चरणबद्ध तरीके से पुनर्वासित करने की तैयारी की जा रही है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर रहेगा जोर
वन विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में मानव गतिविधियां बढ़ने और वन क्षेत्रों के सिकुड़ने से बाघों सहित अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होता है। भोजन और विचरण क्षेत्र कम होने पर वन्यजीव आबादी वाले इलाकों की ओर पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ती हैं।
सरकार का मानना है कि वनग्रामों के पुनर्वास और बाघों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर विकसित होने से न केवल वन्यजीव संरक्षण मजबूत होगा, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।




