June 15, 2026 |

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सीएसआर फंड में गड़बड़ी का आरोप: मरीजों के बजाय अफसरों के कमरों में लगे एसी

CG Durg News: कोरोना की तीसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दी गई सीएसआर राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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दुर्ग। कोरोना की तीसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दी गई सीएसआर राशि के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) द्वारा जिला अस्पताल दुर्ग को दी गई 200 लाख रुपए की सहायता का बड़ा हिस्सा मरीजों की सुविधा के बजाय अधिकारियों और डॉक्टरों के कमरों को आरामदायक बनाने में खर्च कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल 2023 को बीएसपी ने यह राशि कलेक्टर के सीएसआर खाते (क्रमांक 10184627403) में ट्रांसफर की थी। इस फंड का उद्देश्य अस्पताल में इलाज व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करना था। हालांकि जांच में सामने आया कि 40 लाख रुपए से एयर कंडिशनर खरीदे गए, जिन्हें मरीजों के वार्ड या वेटिंग एरिया के बजाय डॉक्टरों, अधिकारियों और प्रशासनिक स्टाफ के कमरों में लगा दिया गया।

जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लॉक में निरीक्षण के दौरान लगभग हर डॉक्टर के कक्ष में एक या दो एसी पाए गए। सिविल सर्जन, आरएमओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के कक्ष भी इससे अछूते नहीं हैं। वहीं, मरीजों के लिए केवल बर्न वार्ड में पुराने एसी लगाए गए हैं, जिन्हें अधिकारियों के कमरों से हटाया गया था।

मामले में वित्तीय पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में है। बीएसपी द्वारा खर्च का पूरा विवरण मांगे जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग अब तक केवल 16.49 लाख रुपए का ही हिसाब प्रस्तुत कर सका है, जिसमें भी मात्र 8.24 लाख रुपए का उपयोगिता प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया है।

तीन साल बाद भी अधूरा हिसाब:

  • 5 अप्रैल 2023: 200 लाख रुपए ट्रांसफर
  • 2023–2026: लगातार पत्राचार
  • 8 जनवरी 2026: 11वां पत्र भेजा गया
  • अब तक: केवल आंशिक जानकारी उपलब्ध

सिविल सर्जन डॉ. आशीषन कुमार मिंज ने पुष्टि की है कि एसी की खरीदी पूर्व अधिकारियों के निर्णय के तहत की गई थी। वहीं, शेष राशि विभिन्न विभागों द्वारा खर्च किए जाने की बात कही जा रही है।

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी का 30 दिनों में जवाब न मिलना भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मरीजों के हित में दी गई राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं किया गया।


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