भोपाल में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन: TET अनिवार्यता के विरोध में 50 हजार से ज्यादा शिक्षक जुटे

Teachers protest against TET: भोपाल: अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर राजधानी भोपाल में शनिवार को बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। भेल स्थित दशहरा मैदान में प्रदेशभर से हजारों शिक्षक ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के तहत एकत्रित हो रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, इस प्रदर्शन में 50 हजार से अधिक शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है।
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो पूरी तरह अनुचित है। उनका तर्क है कि नियुक्ति के समय सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी करने के बाद 20-25 वर्षों की सेवा के पश्चात नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
मोर्चा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से 90 से 95 प्रतिशत तक शिक्षक प्रभावित हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या उन शिक्षकों की है, जो अध्यापक से शिक्षक संवर्ग में शामिल हुए हैं। ये शिक्षक लंबे समय से पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा अवधि की गणना जैसे मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया है कि सरकार नियुक्ति दिनांक से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब TET को अनिवार्य करने से उन पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है। साथ ही, भविष्य में कम पेंशन और ग्रेच्युटी मिलने की आशंका ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
मोर्चा ने बताया कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन किए गए थे। उसी क्रम में अब भोपाल में राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रांतीय संयोजकों ने सभी शिक्षकों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। ई-फाइलिंग के अनुसार, यह याचिका 17 अप्रैल को शाम 4 बजे दर्ज की गई। हाल ही में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों से बैठक कर सकारात्मक आश्वासन दिया था।
दूसरी ओर, संयुक्त मोर्चा के संयोजक राकेश दुबे ने रिव्यू पिटीशन का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम अपनी जगह सही है, लेकिन शिक्षकों की मूल मांगों से अलग है। उनका कहना है कि रिव्यू पिटीशन दाखिल होने के बावजूद शिक्षकों पर TET परीक्षा का दबाव बनाना उचित नहीं है।
कुल मिलाकर, शिक्षकों का यह आंदोलन अब राज्य स्तर पर बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षकों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है।




