September 13, 2026 |

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Kawardha News: कबीरधाम में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई; चीतल का शिकार कर दावत की तैयारी कर रहे 7 शिकारी गिरफ्तार

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Kawardha News: कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। बोड़ला वन परिक्षेत्र के भलपहरी बीट के जंगल में चीतल का शिकार कर उसका मांस पकाने की तैयारी कर रहे सात आरोपियों को वन विकास निगम की स्पेशल टीम ने आधी रात छापेमार कार्रवाई कर गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से चीतल का मांस, शिकार में इस्तेमाल किए गए फंदे, नायलॉन के जाल, कुल्हाड़ियां और अन्य सामान जब्त किया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

गुप्त सूचना पर आधी रात जंगल में दी दबिश

वन विभाग के अधिकारियों को सूचना मिली थी कि बोड़ला वन परिक्षेत्र के भलपहरी बीट के कक्ष क्रमांक आरएफ-2/6 में कुछ लोग वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए वन विकास निगम की स्पेशल टीम ने देर रात विशेष अभियान चलाया। टीम ने जंगल और आसपास के गांवों में एक साथ दबिश देकर सात आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

फंदे में फंसाकर कुल्हाड़ी से की चीतल की हत्या

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले जंगल में नायलॉन के जाल और लोहे के तार से बने फंदे लगाए थे। इन्हीं फंदों में एक चीतल फंस गया, जिसके बाद आरोपियों ने कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने चीतल के शव के टुकड़े किए और मांस पकाकर दावत की तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि, इससे पहले ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी योजना नाकाम कर दी।

मौके से मांस और शिकार का सामान बरामद

कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने आरोपियों के कब्जे से करीब 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन के जाल, लोहे के तार से बने फंदे, लकड़ी के डंडे और तीन कुल्हाड़ियां जब्त कीं। इसके अलावा घटनास्थल से कई अन्य अहम साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच जारी है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला

वन विकास निगम के अधिकारी पितांबर साहू ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 2(16), 9, 39(1)(3), 44, 50 और 51(1)(2) सहित भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

वन विभाग की सख्त चेतावनी

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों का शिकार गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी वन्यजीवों के शिकार या तस्करी की सूचना मिले तो तत्काल वन विभाग को जानकारी दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


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