June 4, 2026 |

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MP News : चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तीन राज्यों की सरकारों को लगाई फटकार

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MP News : ग्वालियर। चंबल नदी में हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या प्रशासन रेत माफिया के आगे कमजोर पड़ गया है? कोर्ट ने अवैध खनन को “organized illegal mining network” बताते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सीधे जब्ती और आपराधिक कार्रवाई के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब सिर्फ चालान काटने से काम नहीं चलेगा। अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को तुरंत जब्त कर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। कोर्ट ने विशेष रूप से बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर चिंता जताई और कहा कि ऐसे वाहन जानबूझकर कानून से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

अदालत ने आदेश दिया कि:

  • अवैध खनन में लगे वाहन तुरंत सीज किए जाएं,
  • वाहन मालिक, फाइनेंसर और पूरे नेटवर्क पर केस दर्ज हो,
  • अवैध परिवहन पर सख्ती से रोक लगाई जाए।

NH-44 पुल की सुरक्षा पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने मुरैना-धौलपुर बॉर्डर स्थित NH-44 पुल के नीचे हो रहे अवैध खनन को गंभीर खतरा बताया। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन केवल अदालत की फटकार के बाद सक्रिय हुआ है और कई कदम दबाव में उठाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश

कोर्ट ने चंबल क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं:

  • 6 महीने के भीतर CCTV और सर्विलांस सिस्टम लगाने के आदेश
  • 1 साल के भीतर Forest Guards की भर्ती पूरी करने के निर्देश
  • NHAI को हाई-रिजॉल्यूशन नाइट विजन कैमरे लगाने के आदेश
  • लाइव CCTV फीड पुलिस और वन विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश
  • चंबल नदी में कचरा फेंकने पर भी सख्त कार्रवाई के आदेश

“कानून का मजाक बन गया है”

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“सिर्फ जुर्माना लेकर छोड़ देना कानून का मजाक है। क्या प्रशासन रेत माफिया के आगे कमजोर है?”

कोर्ट ने आगे कहा कि मामले में “institutional paralysis” और “administrative apathy” देखने को मिली है। अदालत ने चेतावनी दी कि अवैध खनन से चंबल नदी का पर्यावरण, घड़ियाल, डॉल्फिन और अन्य वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने ecological destruction और wildlife threat को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो चंबल क्षेत्र की जैव विविधता को भारी नुकसान हो सकता है।


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